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Sam Pitroda: ईरान में जंग के बीच PAK कहां, नक्सल मुक्त भारत पर क्या बोल गए कांग्रेस नेता? सियासी बवाल की आशंका

Thu, 02 Apr 2026 12:25 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने सरकारी कामकाज में एआई के इस्तेमाल पर कहा, ''एआई का इस्तेमाल सरकार के आकार को कम करने के लिए होना चाहिए। लेकिन आप ऐसा खुलकर नहीं कह सकते, क्योंकि इससे लोग नाराज हो जाएंगे।''
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कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारतीय ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने गुरुवार को ईरान यु्द्ध से लेकर ईवीएम तक कई मामलों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भारत के पश्चिम एशिया मामले पर रुख को लेकर कहा, ''मुझे लगता है कि हमने नैतिकता के मानदंड का पालन नहीं किया। हम वास्तव में ताकतवर और समृद्ध आक्रामक पक्ष के साथ खड़े दिखे हैं।''
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पश्चिम एशिया संघर्ष में पाकिस्तान द्वारा मध्यस्थता की पेशकश पर उन्होंने कहा, ''मेरा मानना है कि हर किसी को प्रयास करना चाहिए। यह उनका अधिकार है कि वे शांति स्थापित करने की कोशिश करें। जितने ज्यादा प्रयास होंगे, उतना बेहतर है। ऐसे हालात में कौन सा प्रयास सफल होगा, यह पहले से नहीं कहा जा सकता।''

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नफरत फैलाकर समुदायों को बांटना छोटी सोच :सैम पित्रोदा
भारतीय ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने कहा, ''यह भारत बनाम पाकिस्तान का सवाल नहीं है। मैं दुनिया को इस नजरिए से नहीं देखता। हर किसी की अपनी भूमिका होती है। आपको उनका सम्मान करना चाहिए। और फिर, धर्म या प्रतिद्वंद्विता के आधार पर नफरत फैलाकर समुदायों को बांटना छोटी सोच है। मुझे उम्मीद है कि हम इतने विकसित हो चुके हैं कि ऐसी संकीर्ण सीमाओं से आगे सोच सकें।''

पश्चिम एशिया पर राहुल गांधी के रुख का किया बचाव
जब उनसे पूछा गया कि क्या पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पश्चिम एशिया पर वही रुख अपनाते जो राहुल गांधी अपना रहे हैं, तो उन्होंने कहा, ''वह एक विचार का प्रतिनिधित्व करते हैं। मेरे लिए वह भारत की उस सोच के संरक्षक हैं जो हमारे संस्थापक नेताओं ने हमें दी- सत्य, विश्वास, लोकतंत्र, विविधता और हर व्यक्ति के सम्मान पर आधारित।''

उन्होंने कहा, ''मेरे अनुसार राहुल गांधी उसी विचार को प्रस्तुत करते हैं। यह पाकिस्तान, अमेरिका, इस्राइल या ईरान के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन सिद्धांतों के पक्ष में है जिनके लिए हम खड़े हैं।''

नक्सल मुक्त भारत पर क्यो बोले सैम पित्रोदा?
भारत के नक्सलवाद से मुक्त होने पर उन्होंने कहा, ''मैं संवाद में विश्वास करता हूं, बल प्रयोग में नहीं। मैंने कभी बल प्रयोग में विश्वास नहीं किया। लेकिन ये समस्याएं बहुत जटिल हैं। यह 50 वर्षों से चल रही हैं। अगर आप इसकी जड़ में जाएंगे तो समझना होगा कि लोगों ने हथियार क्यों उठाए। इसका मतलब यह नहीं कि मैं उसका समर्थन कर रहा हूं। लेकिन आपको हर पहलू से चीजों को देखना होगा, सिर्फ अपने नजरिए से नहीं।''

उन्होंने कहा, ''आपको सहानुभूति रखनी होगी, दूसरों के नजरिए से समझना होगा कि उन्होंने यह रास्ता क्यों चुना। यही महात्मा गांधी का सिद्धांत था। मुझे खुशी है कि अब हिंसा नहीं है, डर नहीं है, लेकिन किस कीमत पर और कैसे यह हुआ, यह बहुत जटिल मुद्दा है।''

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चुनाव प्रक्रिया पर खड़े किए सवाल
भारत की चुनाव प्रक्रिया पर उन्होंने कहा, ''पूरी प्रक्रिया में कुछ न कुछ ठीक नहीं है- चाहे वह ईवीएम हो, वीवीपैट हो, इलेक्ट्रॉनिक छेड़छाड़ हो, सॉफ्टवेयर में बदलाव, मतदाता सूची या वीडियो रिकॉर्डिंग। जब आप पूरी प्रक्रिया को देखते हैं तो कई ऐसे बिंदु दिखते हैं जहां हेरफेर हो सकता है।''

उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि कहीं न कहीं ऐसा हो भी रहा है। कितना और कहां, यह बताना मुश्किल है, क्योंकि यह एक जगह नहीं बल्कि अलग-अलग जगहों पर हो सकता है। इसलिए मुझे विश्वास नहीं है कि भारत में चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र हैं। मैंने भरोसा खो दिया है।''

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