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कोरोना मरीजों की कॉल डिटेल मामले में केरल हाईकोर्ट ने खारिज की नेता प्रतिपक्ष की याचिका

Sat, 22 Aug 2020 02:29 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
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Ramesh chennithala - फोटो : ANI
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केरल हाईकोर्ट ने कोरोना मरीजों का कॉल रिकॉर्ड (सीडीआर) मामले में दाखिल कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला की याचिका खारिज कर दी है। केरल विधानसभा में नेता विपक्ष चेन्निथला ने निजता का हवाला देते हुए पुलिस को कोरोना पीड़ितों की कॉल डिटेल निकालने से रोकने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

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चीफ जस्टिस एस मणिकुमार की पीठ ने राज्य सरकार की दलीलें सुनने के बाद नेता प्रतिपक्ष की याचिका खारिज कर दी। सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा, पुलिस कोरोना को फैलने से रोकने के लिए महामारी की चपेट में आए लोगों की टॉवर लोकेशन ले रही है। ताकि पता लगे कि संक्रमित व्यक्ति क्वारंटीन अवधि में कहां गया और किससे मिला। कोविड को लेकर केंद्र की गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन हो रहा है।


सरकार ने कहा, सीडीआर पूरी तरह से गोपनीय है और इसका इस्तेमाल मोबाइल टॉवर लोकेशन का पता लगाने जैसे सीमित उद्देश्य के लिए ही किया जा रहा है। सीडीआर पुलिस की विशेष टीम निकालती है। इसमें किसी तीसरी पार्टी की सेवा नहीं ली जा रही। बाद में सीडीआर पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाता है।
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चेन्निथला ने दावा किया था कि कॉल डिटेल निकालने का फैसला असांविधानिक है। जबकि पी विजयन सरकार का कहना था कि इससे निजता को कोई खतरा नहीं होगा।

पोक्सो मामलों की जांच में पेशेवर दक्षता की स्पष्ट कमी: हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने बाल अपराध से जुड़े मामलों की जांच में पेशेवर दक्षता की कमी पर सवाल खड़े किए हैं। शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि पोक्सो (बाल यौन अपराधों से संरक्षण) मामलों की जांच में पेशेवर अंदाज की स्पष्ट कमी नजर आती है।

जस्टिस पीबी सुरेश कुमार ने यह टिप्पणी तब की जब उन्हें पता चला कि अप्रैल, 2015 में राज्य सरकार द्वारा तय किए गए दिशानिर्देश पब्लिक डोमेन में उपलब्ध नहीं हैं।

इस पर जस्टिस कुमार ने कहा, अदालत पोक्सो मामलों में जांच और ट्रायल को लेकर कुछ सामान्य दिशानिर्देश जारी करेगी। हम इस क्षेत्र में न्यायिक डिलीवरी की गुणवत्ता को लेकर चिंतित है। पोक्सो मामलों की जांच वैसे पुलिस अधिकारी कर रहे हैं, जो बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों में पीड़ित बच्चों और उनके परिजनों से बर्ताव को लेकर जानकार या प्रशिक्षित नहीं हैं।
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अदालत ने राज्य के सरकारी वकील और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को निर्धारित की है।

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