नहीं हो रही 'प्रादेशिक सेना-जीडी भर्ती'
रिटायर्ड कर्नल रोहित चौधरी के मुताबिक, आपने 'भारतीय प्रादेशिक सेना' के बारे में तो सुना ही होगा। क्या आपको पता है, 2019 के बाद देश में एक भी 'प्रादेशिक सेना-जीडी भर्ती' नहीं हुई है। पूरे पांच साल हो चुके हैं। भर्ती के लिए देश का युवा, लगातार गुहार लगा रहा है, लेकिन केंद्र सरकार चुप्पी साधे है। मीडिया में भी इस मुद्दे पर चर्चा नहीं हो रही। 'भारतीय प्रादेशिक सेना' को ज्वाइन करना, ये भी युवाओं का एक सपना होता है। ऐसे देशभक्त युवा, जो किन्हीं कारणों से आर्मी की ओपन रैली में भर्ती होने से रह जाते थे, वे 'भारतीय प्रादेशिक सेना' में जाकर राष्ट्र सेवा का जुनून पूरा करते थे। भारतीय प्रादेशिक सेना ने देश की आजादी के बाद, भारत के सभी युद्धों में भाग लिया है। इनमें 1962 का भारत-चीन युद्ध, 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध, 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध और 1999 का कारगिल युद्ध शामिल है। बतौर रोहित चौधरी, मोदी सरकार, भारतीय सेना में एक तरफ कमजोर 'अग्निवीर' स्कीम लेकर आई है, तो वहीं दूसरी ओर सैन्य संख्या बल को भी कम कर दिया है। प्रादेशिक सेना में भी युवाओं को नहीं ले रहे। क्या यही है मोदी सरकार का झूठा सेना, झूठा राष्ट्रवाद व झूठा देशप्रेम।
सेना में हर साल 40 हजार जवानों की कटौती
रिटायर्ड कर्नल रोहित चौधरी के अनुसार, सरकार ने कहा है कि सभी अग्निवीरों को चार साल बाद नौकरी देंगे। क्या सच में चार साल बाद अग्निवीरों को सरकारी नौकरी मिलेगी, यह एक बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा, जब सरकारी नौकरी लेने के लिए पूर्व सैनिक पहले से ही कतार में लगे हैं, तो सभी अग्निवीरों को पक्की नौकरी कैसे मिलेगी। पहले सेना में लगभग 80 हजार भर्तियां, हर वर्ष होती थीं। अग्निपथ स्कीम के तहत 40 हजार (वार्षिक) जवानों को सेना में कम कर दिया गया है। इसके अलावा केंद्र सरकार में पूर्व सैनिकों के 8.10 लाख पद हैं। इनमें से 7.70 लाख पद (95 फीसदी) खाली हैं। अब 'अग्निवीर' भी सरकारी नौकरी लेने वाली कतार में खड़े हो जाएंगे। इसके चलते चार वर्ष बाद सभी अग्निवीरों को नौकरी कैसे मिलेगी। कोरोनाकाल के दौरान 2020, 2021 व 2022 में मोदी सरकार ने सेना में भर्तियां नहीं की। महज तीन साल में सेना में 2.25 लाख पद कम कर दिए। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार चार साल बाद सभी अग्निवीरों को नौकरी कैसे देगी। क्या मोदी सरकार का दो करोड़ सालाना नौकरियों की तरह, चार साल बाद अग्निवीरों को नौकरी देने की बात भी महज एक जुमला साबित होगी।
सेना की बिना सहमति के लाई गई अग्निपथ योजना
राहुल गांधी, अपनी चुनावी रैलियों में कह रहे हैं, अग्निपथ योजना, युवाओं और राष्ट्र की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। इसी सप्ताह मध्यप्रदेश के शहडोल में एक रैली के दौरान राहुल ने कहा, अग्निपथ योजना, भारतीय सैनिकों को उनके चीनी समकक्षों के मुकाबले बड़ी मुश्किल में डालती है। अग्निवीरों को सिर्फ छह माह की ट्रेनिंग दी जाती है, जबकि चीनी सैनिकों को पांच वर्षों तक ट्रेनिंग मिलती है। बतौर राहुल गांधी, अग्निवीर भर्ती की अवधारणा का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है। सेना ने इस स्कीम का विरोध किया था। इस योजना में कई तरह की कमियां हैं, जिसकी वजह से 'अग्निवीर' कहे जाने वाले भारतीय सैनिकों को युद्ध के दौरान बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इस योजना को सेना की सहमति के बिना लाया गया था। राजस्थान के बीकानेर में एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और दूसरे राज्य, अपने युवाओं को सेना में भेजते थे। सेना गारंटी देती थी कि अगर आपको कुछ हुआ तो भारत सरकार आपका ख्याल रखेगी। उन्हें शहीद का दर्जा मिलेगा, पेंशन मिलेगी। शहादत की स्थिति में परिवार को मुआवजा, पेंशन और कैंटीन की सुविधा मिलेगी।
अग्निवीर योजना में बदलाव संभव: रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले दिनों कहा था, उनकी सरकार जरूरत पड़ने पर अग्निवीर भर्ती योजना में बदलाव के लिए तैयार है। हालांकि राजस्थान में चुनाव प्रचार के दौरान रक्षा मंत्री ने कहा, अग्निवीरों का भविष्य बेहद सुनहरा है। अग्निवीरों को अलग-अलग सरकारी विभागों में नौकरी मिलेगी। रोहित चौधरी ने कहा, तत्कालीन चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल एमएम नरवणे भी कह चुके हैं कि अग्निवीर योजना, तीनों सेनाओं पर थोपी गई स्कीम है। अग्निवीर योजना न देशहित में है और न ही युवाओं के हित में है। अग्निपथ योजना को लेकर पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने अपनी किताब में लिखा था, अग्निपथ स्कीम से सेना 'आश्चर्यचकित' हो गई थी। खासतौर पर, नौसेना और वायु सेना के लिए, यह नीले रंग से बोल्ट की तरह आया था। इसके अलावा, यह योजना सैनिकों के समानांतर कैडर बनाकर हमारे जवानों के बीच भेदभावपूर्ण स्थिति पैदा करती है। सेना में एक जैसी ड्यूटी के लिए समान काम करने की उम्मीद की जाती है, लेकिन बहुत अलग परिलब्धियों, लाभों और संभावनाओं के साथ। बतौर चौधरी, चार साल की सेवा के बाद अधिकांश अग्निवीरों को अनिश्चित जॉब मार्केट में छोड़ दिया जाएगा। कुछ लोगों का तर्क है कि इससे सामाजिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है।