भारत-चीन सीमा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। इस विवाद के बीच जब केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा, भारत की सीमाओं का कोई अपमान नहीं कर सकता। यह निर्णायक परिचय पूरे विश्व में भारत के परिचय में परिवर्तित हुआ है। जब कभी रक्षा के क्षेत्र की बात होती थी, तब दो ही देशों की बात होती थी। एक अमेरिका और दूसरा इस्राइल का नाम सामने आता था। ये दोनों देश अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए सचेत और चौकन्ने रहते हैं। आज इन दो देशों की सूची में हमारे महान भारत का तीसरा नाम जोड़ने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है। शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने लद्दाख में चीन के पुलों पर सवाल उठा दिया है। उन्होंने कहा, क्या इन पुलों का अवैध निर्माण हमारी भौगोलिक अखंडता पर हमला नहीं है। क्या यह निर्माण उस संघर्ष विराम का खुला उल्लंघन नहीं है, जिसके चलते भारत ने सामरिक दृष्टि वाले महत्वपूर्ण इलाकों से अपना कब्जा छोड़ दिया था।
आखिर देश को अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है: पवन खेड़ा
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रेस वार्ता में कहा, पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग झील वाले इलाके में चीन द्वारा दूसरे पुल के निर्माण पर विदेश मंत्रालय का बयान विरोधाभाषी है। विदेश मंत्रालय को सही पता नहीं है तो रक्षा मंत्रालय को स्थिति को स्पष्ट करने के लिए सामने आना चाहिए। आखिर देश को अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है। खेड़ा ने सवाल के लहजे में पूछा, क्या यह सही नहीं है कि चीन पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग झील वाले जिस इलाके में पुल का निर्माण कर रहा है, उसे नई दिल्ली दशकों से चीन द्वारा अनाधिकृत 'कब्जे' वाला क्षेत्र मानता है। क्या ऐसे में विदेश मंत्रालय की ओर से यह टिप्पणी आना कि जिस क्षेत्र का उल्लेख किया गया है उस क्षेत्र के बारे में हमने हमेशा महसूस किया है कि इस क्षेत्र पर चीन ने कब्जा कर लिया था, असमंजस की स्थिति पैदा करता है। केंद्र सरकार को देश के समक्ष सही तस्वीर पेश करनी चाहिए।
हमारी वीर सेना दुश्मन को मुंह तोड़ जवाब देती है ...
पवन खेड़ा ने कहा, कूटनीति में भाषा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। जहां हमारी वीर सेना दुश्मन को मुंह तोड़ जवाब देती है, वहां ऐसी ढुलमुल टिप्पणी देश के हौसले का मजाक उड़ाती है। विदेश मंत्रालय का यह बयान चीन द्वारा रणनीतिक रूप से स्थित पैंगोंग त्सो क्षेत्र में एक-दूसरे पुल के निर्माण की खबरों पर सवालों के जवाब में आया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, हमने पुल पर रिपोर्ट देखी है। यह एक सैन्य मुद्दा है। हम इसे एक अधिकृत क्षेत्र मानते हैं। इस मामले में रक्षा मंत्रालय ही बेहतर बयान दे सकता है। इस साल जनवरी में जब चीन द्वारा पैंगोंग त्सो पर पहला पुल बनाए जाने की खबरें सामने आईं थी, तो विदेश मंत्रालय ने कहा था कि यह उस क्षेत्र में स्थित है जो 60 वर्षों से चीन के अवैध कब्जे में है।
पीएलए के बड़े-बड़े वाहन, आर्टिलरी उस पुल से गुजर सकते हैं...
पवन खेड़ा के मुताबिक, पैंगोंग झील पर जिस पुल का निर्माण हो रहा है, वह इतना चौड़ा है कि वहां से चीनी सेना के बड़े-बड़े वाहन व आर्टिलरी गुजर सकती है। पैंगोंग झील पर बने पुल के दोनों सिरों पर एक तरह से चीन ने अपना आधिपत्य जमा दिया है। वह उनका दुरुपयोग, भारत के खिलाफ करेगा। अगर भारत सरकार इसमें स्पष्टीकरण नहीं देती है तो यह माना जाएगा कि भारत सरकार अपने प्रधानमंत्री की छवि बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। अपनी सीमाओं की रक्षा करने को तैयार नहीं है। पिछले कई दशकों से हम जिसे अपना इलाका मानते आए हैं, भारत सरकार उस पर भी आंखें मूंदने को तैयार है। अब वहां पर ऐसी कोई ऊंचाई नहीं है, जहां हमारी सेना ठहर कर मुकाबला कर पाए। वजह, वह एक स्ट्रैटेजिक प्वाइंट हैं, वहीं पर चीन अपना काम करता चला गया।
पहले भारत की कोई रक्षा नीति ही नहीं थी: अमित शाह
गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा 'स्वराज से नव-भारत तक भारत के विचारों का पुनरावलोकन' विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए कहा था, जहां तक सुरक्षित भारत का सवाल है, पीएम नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के पहले भारत की कोई रक्षा नीति ही नहीं थी। हम विदेश नीति को ही रक्षा नीति मानते थे। इस देश पर वर्षों से हमारे पड़ोसी देशों द्वारा आतंकवादी भेजे जाते थे। उरी और पुलवामा में इन आठ सालों में भी जब ऐसे प्रयास हुए, तो भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक कर मुंह तोड़ जवाब दिया। दुश्मन को उसके घर में घुस कर सबक सिखाया। तब समग्र विश्व के सामने भारत की रक्षा नीति क्या है, यह स्पष्ट हो गया। हम विश्व भर के देशों के साथ अच्छे रिश्ते रखना चाहते हैं, हम सबको साथ में लेकर चलना चाहते हैं, हम शांति चाहते हैं और शांति के पुजारी भी हैं।
भारत की सीमाओं का कोई अपमान नहीं कर सकता ...
केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा, जो हमारी सेना और सीमा के साथ छेड़खानी करेगा, उसको उसी की भाषा में जवाब देने के लिए हम दृढ़ निश्चयी भी हैं। पहली बार देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के मामले में देश के एक नेता ने निर्णायक भाषा के साथ विश्व को अपना परिचय कराया है। यहां पर वे पीएम नरेंद्र मोदी के संदर्भ में बात कर रहे थे। भारत की सीमाओं का कोई अपमान नहीं कर सकता। आज अमेरिका और इस्राइल की तरह भारत अपनी सीमाओं की चौकसी करता है। पूर्वोत्तर में बहुत सारे हथियारबंद समूह थे। पिछले आठ साल में इन समूहों के 9000 कैडर हथियार डालकर मुख्यधारा में लौट आए हैं। बहुत सारे समझौते हुए हैं, कार्बी आंगलोंग, बोडोलैंड, ब्रू और एनएलएफटी के समझौते हुए। पहले 'एएफएसपीए' हटाने के लिए आंदोलन करने पड़ते थे। भारत सरकार के लोग बचाव की मुद्रा में जवाब देते थे, लेकिन आज नार्थ ईस्ट में शांति स्थापित होने के कारण उत्तर पूर्व के 75 फीसदी हिस्से से हमने 'एएफएसपीए' को हटाने का काम किया है।