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Assam: आदिवासी कार्यकर्ता पर NSA की कार्रवाई पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, जयराम रमेश बोले- ये कानून का दुरुपयोग

Sun, 02 Aug 2026 02:00 PM IST
Devesh Tripathi पीटीआई, नई दिल्ली

सार

असम में आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार असहमति जताने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कानूनों का अनुचित इस्तेमाल कर रही है।
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कांग्रेस सांसद जयराम रमेश - फोटो : ANI
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विस्तार
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कांग्रेस ने रविवार को असम सरकार द्वारा आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में लिए जाने पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने आरोप लगाया कि डोले के खिलाफ एनएसए का इस्तेमाल भाजपा सरकारों की उस बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है, जिसमें असहमति की आवाज को दबाने के लिए असाधारण कानूनों का हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
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विपक्षी दल ने इसे निवारक हिरासत संबंधी कानूनों का स्पष्ट दुरुपयोग और राज्य सरकार की सीमा से आगे बढ़कर की गई कार्रवाई भी बताया। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि 30 जुलाई को असम सरकार ने प्रणब डोले के खिलाफ एनएसए लगाया। यह कार्रवाई जिला अदालत द्वारा उन्हें जमानत दिए जाने के एक दिन बाद की गई।

प्रणब डोले को क्यों किया गया गिरफ्तार?
जयराम रमेश ने एक्स पर कहा, "यह निवारक हिरासत संबंधी कानूनों का स्पष्ट दुरुपयोग और राज्य सरकार की सीमा से आगे बढ़कर की गई कार्रवाई है।" उन्होंने कहा कि डोले को उन ग्रामीणों का समर्थन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, जो काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास प्रस्तावित पांच सितारा रिसॉर्ट का विरोध कर रहे थे। इस परियोजना का समर्थन असम के मुख्यमंत्री ने किया था।
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कांग्रेस नेता ने कहा कि वर्ष 2022 से गोलाघाट के आदिवासी निवासी इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने इस मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी। उनका आरोप है कि उनकी जमीन जबरन अधिग्रहित की गई। 

अदालत की टिप्पणी का जिक्र कर क्या बोले जयराम रमेश?
उन्होंने कहा कि 29 जुलाई को जमानत देते समय सत्र अदालत ने कहा था, "जहां पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी समुदाय के अस्तित्व का सवाल जुड़ा हो, वहां स्थानीय लोगों की जायज चिंताओं को दबाने के लिए आपराधिक कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।" रमेश ने आरोप लगाया कि असम सरकार ने एनएसए लगाकर ठीक यही करने की कोशिश की है।

रमेश ने कहा कि डोले के खिलाफ जारी एनएसए निरोध आदेश अस्पष्ट और अनुमान आधारित आरोपों पर टिका है। इनमें यह आरोप भी शामिल है कि डोले ने "संदिग्ध स्रोतों से संदिग्ध विदेशी लेनदेन" किए हैं, जो मोदी सरकार की "पहले से अपनाई जा रही कार्यशैली" है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह की कोशिशें देखने को मिलीं, जहां नोएडा में शोषणपूर्ण कार्य परिस्थितियों के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले श्रमिक अधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ एनएसए लगाया गया। 

असम सरकार की आलोचना
उन्होंने कहा कि देशभर की भाजपा सरकारें मजदूरों, आदिवासी समुदायों और समाज के हाशिये पर रहने वाले लोगों की वैध शिकायतों को गिरफ्तारी और कठोर कानूनों के जरिए दबा नहीं सकतीं। डोले को 13 जुलाई को गुवाहाटी से गिरफ्तार किया गया था और उन्हें गोलाघाट जिला जेल भेजा गया था। जून में हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में बुधवार को एक अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी। हालांकि, राज्य सरकार ने गुरुवार को उनके खिलाफ एनएसए लगा दिया, जिससे उनकी उसी जेल में हिरासत जारी रही। आदेश में यही कहा गया है।

रमेश ने कहा, "असम सरकार कानून के शासन और लोकतांत्रिक असहमति के प्रति लगातार पूरी तरह उपेक्षा का रवैया अपना रही है। सुप्रीम कोर्ट और कई उच्च न्यायालय बार-बार यह चेतावनी दे चुके हैं कि निवारक हिरासत संबंधी कानूनों का इस्तेमाल जमानत देने वाले न्यायिक आदेशों को निष्प्रभावी करने, उन्हें दरकिनार करने या केवल किसी व्यक्ति की हिरासत लंबी करने के साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।" 

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास प्रस्तावित पांच सितारा होटल के विरोध से जुड़े एक मामले में जमानत मिलने के एक दिन बाद डोले को एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया।
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