17वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में मतदाताओं ने प्रचंड बहुमत के साथ देश की बागडोर फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में सौंप दी। भाजपा ने इस बार 2014 से भी बड़ी और ऐतिहासिक जीत दर्ज की। अब देश की नजर शपथग्रहण से लेकर 'मोदी 2.0' के कैबिनेट गठन पर है। भाजपा ने देश की 542 में से 303* सीटों पर जीत दर्ज की। उसके सहयोगी दलों का आंकड़ा जोड़ें तो कुल 352* सीटों पर एनडीए काबिज हुई है। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस को महज 52 सीटों पर जीत हासिल हुई है।
ऐसे में देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को एक बार फिर लोकसभा में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा हासिल नहीं हो पाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि पार्टी लोकसभा में 10 फीसदी सीट(55) पाने में नाकाम रही है। साथ ही राहुल गांधी को लीडर ऑफ द अपोजीशन (एलओपी) का पद मिलने की संभावना नहीं दिख रही है। एलओपी के पद के लिए पार्टी को 543 में से 55 सीटों को जीतना जरूरी होता है। जबकि कांग्रेस महज 52 सीट ही पा सकी है, अभी भी इस पद को पाने के लिए उसके पास तीन सीटों की कमी है।
भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन जब 2014 में सत्ता में आया था, उस वक्त उसने कांग्रेस को एलओपी का पद देने से मना कर दिया था। ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस ने उस वक्त महज 44 सीट जीती थीं और ये अपेक्षित मानदंडों के मुताबिक नहीं था।