कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा मध्य प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में खासतौर से फोकस कर रही हैं। वह बड़े पैमाने पर प्रचार के लिए समय देंगी। कांग्रेस की तैयारी मालवा-निमाड़ क्षेत्र के तहत आने वाली 66 सीटों में बड़ी सेंध लगाने की है। मालवा निमाड़ क्षेत्र में काफी पहले से भाजपा का दबदबा है। वहीं ग्वालियर चंबल संभाग क्षेत्र में आने वाली 34 विधानसभा सीटों पर 2018 में कांग्रेस ने कमाल कर दिया था। 34 सीटों में से भाजपा केवल 7 जीत पाई थी। इस नतीजे ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के हौसले को इतना बढ़ा दिया था कि वह नतीजा आने के बाद मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी करने लगे थे। इसी क्षेत्र के अधिकांश विधायकों ने सिंधिया का साथ दिया और वह बागी हो गए। भाजपा में चले गए। कांग्रेस की कमलनाथ की सरकार गिर गई और शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बन गए।
ग्वालियर चंबल संभाग में अपना दबदबा बनाए रखना चाहती है कांग्रेस
इस क्षेत्र की कुछ सीटें ऐसी हैं, जहां से कांग्रेस के सिवा दूसरे उम्मीदवार का खाता नहीं खुला। ये क्षेत्र की वही 34 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदबा माना जाता है। लेकिन इस बार खबर आ रही है कि मतदाता भाजपा और सिंधिया से बहुत खुश नहीं हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कई समर्थक उनका साथ छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। भाजपा को इसका आगे भी डर सता रहा है कि कहीं चुनाव नजदीक आने पर और लोग बागी न हो जाएं। इसके लिए भाजपा ने केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र तोमर की भूमिका को बढ़ाया है। नरोत्तम मिश्रा को सक्रिय किया है। कैलाश विजयवर्गीय और ज्योतिरादित्य की केमिस्ट्री ठीक नहीं रहती। हालांकि वर्गीय पर अमित शाह भरोसा करते हैं। इसलिए नाराजगी को थामने के लिए विजयवर्गीय भी सक्रिय हैं।
कांग्रेस के रणनीतिकार बताते हैं कि भाजपा ने क्षेत्र में कई तरह के माइक्रो मैनेजमेंट के प्रयास शुरू किए हैं। इसके समानांतर कांग्रेस ने भी अपनी सतर्कता बढ़ा दी है। कमलनाथ पहले ही इसे भांप चुके थे। लिहाजा समय रहते उन्होंने नेता प्रतिपक्ष का पद 7 बार के विधायक गोविंद सिंह के लिए छोड़ दिया था। गोविंद सिंह लहार विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते हैं। 33 साल से सीट पर काबिज हैं। लहार की तरह ही राघौगढ़ है। यह पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का क्षेत्र है। उनके परिवार का ही यहां 1990 से दबदबा है। बेटे जयवर्धन सिंह विधायक हैं। छिछोर में कांग्रेस के केपी सिंह कद्दावर छवि बनाए हैं। 30 साल से भाजपा छिछोर को जीतने का सपना देख रही है। भितरवार में लाखन सिंह की भी दमदार छवि है। डाबरा विधानसभा भी कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। भाजपा के रणनीतिकार इन सीटों में सेंध लगाने का सपना पालकर कांग्रेस को उलझाने की रणनीति बना रहे है। इसके समानांतर कांग्रेस ने अपने किले को मजबूत बनाकर ज्योतिरादित्य सिंधिया को कड़ा संदेश देने का मन बनाया है। बताते हैं कि कांग्रेस के नेता कमलनाथ और दिग्विजय सिंह इस रणनीति को विशेष महत्व दे रहे हैं।
भाजपा को पता है ग्वालियर चंबल संभाग की दशा
भाजपा के रणनीतिकारों को मालूम है कि उन्हें ग्वालियर चंबल संभाग में मेहनत करनी पड़ेगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी इसी क्षेत्र से हैं। पिछले साल हुए नगर निकाय चुनावों ने ही इसका संकेत दे दिया था। दूसरे जिस तरह से सिंधिया के पीछे खड़े रहने वाले आधा दर्जन से अधिक नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ले ली है, वह भी एक बड़ा संकेत है। इसलिए भाजपा के रणनीतिकार कोई समझौता नहीं करना चाहते। पार्टी के शीर्ष नेता ने कहा कि 2028 में कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसकी एक बड़ी वजह कांग्रेस को मिली जीत थी। कमलनाथ की सरकार भी इस क्षेत्र के नेताओं के भाजपा में जाने के बाद ही गिरी थी। इसलिए आगामी विधानसभा चुनाव को ज्योतिरादित्य सिंधिया की भी कड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
बुंदेलखंड,विंध्य, महाकौशल,जबलपुर छिंदवाडा में कांग्रेस को उम्मीद
भाजपा का किला मालवा निमाड़ में मजबूत रहता है। कांग्रेस के नेता अरुण यादव कहते हैं कि चुनाव की तारीख नजदीक आने दीजिए। कुछ कहना नहीं पड़ेगा। महाकौशल में भी निकाय चुनाव में भाजपा को सफलता नहीं मिल पाई थी। बताते हैं शिवराज सरकार से जनता खुश नहीं है। इसका फायदा कांग्रेस को मिलेगा। जबलपुर, छिंदवाड़ा को लेकर कांग्रेस कभी अधिक चिंतित नहीं रही। कांग्रेस के नेता कहते हैं कि विंध्यक्षेत्र और बुंदेलखंड में भी इस बार चुनाव नतीजा अच्छा आएगा। भोपाल के आस-पास भी कांग्रेस माइक्रो मैनेजमेंट पर काम कर रही है।