अनजाना भय एक फोबिया की तरह है। राजनीति में हमेशा रहता है और गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर इस बार कांग्रेस मुख्यालय के करीब हर बड़े नेता के मन में छाया हुआ है।
एक तरफ सर्वे कांग्रेस के लिए अच्छी खबर दे रहे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस के कई बड़े नेताओं के दिमाग में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की अगली रणनीति सता रही है। दिलचस्प यह है कि इस रणनीति के बारे में किसी को पता नहीं है। वहीं, भाजपा मुख्यालय से लेकर दिल्ली के गुजरात भवन और गुजरात कॉडर के कुछ नौकरशाह इसको लेकर बड़ी उम्मीद पाले हैं।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि उनके अध्यक्ष हमेशा नये सिरे से सोचते हैं। उनके पास हमेशा करने के लिए कुछ नया, चौंकाने वाला और पार्टी हित में होता है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और केन्द्र सरकार में राज्यमंत्री रहे राजीव प्रताप रूडी अमित शाह की राजनीति और उनके साथ काम करने के कायल हैं।
रूडी का कहना है कि जहां से आम तौर पर नेताओं की सोच अपनी सीमा पूरी कर लेती है, उसके आगे से उनकी पार्टी के अध्यक्ष सोचना शुरू करते हैं। रूडी ने यह टिप्पणी बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान की थी।
पार्टी के करीब-करीब तमाम वरिष्ठ नेता इससे सहमत है। गुजरात चुनाव के परिप्रेक्ष्य में इस अनजाने से भय और भाजपा के जीत के आखिरी दांव के बारे में पूछने पर बिना चर्चा में आए तमाम भाजपा के नेताओं का कहना है कि 18 दिसंबर 2017 का इंतजार कीजिए।
पार्टी के एक केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि सर्वे चाहे जो कह रहा हो, लेकिन गुजरात में सरकार भाजपा की बनेगी। गुजरात के संयुक्त सचिव स्तर के नौकरशाह का कहना है कि वह भी सर्वे से ज्यादा समय पर भरोसा करते हैं। उन्हें विश्वास है कि अंतिम समय तक कुछ ऐसा हो जाएगा, जिससे गुजरात की जनता भाजपा की सरकार बनवा देगी।
सूत्र का कहना है कि वह हर बार विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार सुनते रहते हैं और अंत में नतीजा कुछ और आता है। गुजरात भवन में तैनात एक अफसर का भी यही मानना है।