हिमाचल प्रदेश को कांग्रेस मुक्त बनाने के लिए भाजपा भविष्य की रणनीति बनाने में लग गई है। वहीं कांग्रेस मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर कसे शिकंजे के बाद राजनीतिक तौर पर उलझ गई है। कांग्रेस के सामने पांच राज्यों की चुनावी समीक्षा से बड़ा सवाल हिमाचल प्रदेश का है, जहां साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी आधिकारिक तौर पर वीरभद्र सिंह के साथ खड़ी दिख रही है लेकिन पार्टी नेता इस मुद्दे पर जल्द फैसला चाहते हैं।
हिमाचल से जुड़े पार्टी नेताओं का भी मानना है कि सीएम वीरभद्र के खिलाफ सीबीआई और ईडी की कार्रवाई होने पर पार्टी के सामने क्या विकल्प होगा। ये सवाल आलाकमान के लिए भी सबसे महत्वपूर्ण है। अगर वीरभद्र ही पार्टी का चेहरा होंगे तो भी इस सवाल का जवाब जल्द देना होगा। ताकि उसी आधार पर चुनाव की रणनीति बनाई जा सके।
पार्टी नेता मानतेे हैं कि वीरभद्र को सामने रखकर चुनाव लड़ने पर खतरा इस बात का होगा कि भाजपा भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर मैदान में उतरेगी। ऐसे में पार्टी का फोेकस सरकार की उपलब्धियों गिनाने से अधिक आरोपों के जवाब तलाशने पर होगा।
कांग्रेस उत्तराखंड की तरह पहाड़ी राज्य हिमाचल खोना नहीं चाहती है। कांग्रेस को पंजाब में चेहरा घोषित करने का लाभ मिला लेकिन उत्तराखंड में हरीश रावत सरकार का कामकाज और चेहरा जनता ने नकार दिया। कांग्रेस में पहली बार दो जगह से चुनाव लड़ने के बाद भी सीएम की हार हुई।
वीरभद्र के साथ खड़ी है पार्टी: अंबिका
हिमाचल से जुड़े इन सवालों पर राज्य की प्रभारी और कांग्रेस महासचिव अंबिका सोनी का कहना है कि वीरभद्र को लेकर कांग्रेस पूरी तरह एक है। वह हमारे वरिष्ठ नेता हैं। पार्टी मानती है कि राजनीतिक विद्वेष के चलते ही उन पर निशाना साधा जा रहा है। कांग्रेस उनके साथ खड़ी है। हिमाचल में विधानसभा चुनाव से जुड़ा कोई भी फैसला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को ही लेना है।