लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण से पहले कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, मोदी सरकार में 21 अरबपतियों और विशाल निगमों को तो टैक्स में कटौती दी गई, लेकिन वेतनभोगी, मध्यम वर्ग और श्रमिक पहले से कहीं अधिक आयकर का भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने कहा, जब डॉ. मनमोहन सिंह ने पद छोड़ा, तो व्यक्तिगत आयकर कुल टैक्स संग्रह का 21 प्रतिशत था, जबकि कॉर्पोरेट टैक्स 35 प्रतिशत था।
कांग्रेस नेता जयराम ने एक्स पर एक पोस्ट में आरोप लगाया, हाउडी मोदी कार्यक्रम से दो दिन पहले, केंद्र ने भारी कॉर्पोरेट कर कटौती की घोषणा की, जिससे सरकारी खजाने को दो लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। उन्होंने दावा किया कि आज कुल टैक्स संग्रह में कॉर्पोरेट टैक्स का हिस्सा तेजी से गिरकर एक दशक के सबसे निचले स्तर मात्र 27.1 प्रतिशत पर आ गया है। वहीं, कुल टैक्स संग्रह में व्यक्तिगत आयकर का हिस्सा बढ़कर 27.4 प्रतिशत हो गया है।
मोदी सरकार में 29 प्रतिशत से नीचे गया निजी निवेश
कांग्रेस महासचिव ने कहा, निजी निवेश में उछाल के बिना, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में तेजी नहीं आ सकती। जबकि वित्त मंत्री ने दावा किया कि ये कॉर्पोरेट हैंडआउट्स इस तरह की तेजी लाएंगे। इसके बजाय, डॉ. मनमोहन सिंह के तहत निजी निवेश जीडीपी के 25 प्रतिशत के शिखर से नीचे आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के पूरे कार्यकाल में यह 29 प्रतिशत से नीचे चला गया।
पीएम मोदी और मनमोहन सरकार के कार्यकाल की तुलना की
कांग्रेस नेता रमेश ने जोर देकर कहा, हालांकि कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती की गई है, लेकिन इससे केवल विशाल निगमों और भारत के 21 अरबपतियों को लाभ होता है। स्वामित्व और साझेदारी जैसे छोटे व्यवसाय आयकर का भुगतान करते हैं, कॉर्पोरेट टैक्स का नहीं। उन्होंने कुल एकत्रित टैक्स के प्रतिशत के रूप में व्यक्तिगत आयकर संग्रह में वृद्धि और कॉर्पोरेट टैक्स संग्रह में गिरावट को उजागर करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार और मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल की तुलना करने के लिए एक ग्राफ भी साझा किया।