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Congress: 'वन संरक्षण कानून में बदलाव से जंगलों के निजीकरण का रास्ता खुला'; कांग्रेस का केंद्र सरकार पर आरोप

Wed, 07 Jan 2026 12:35 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि 2023 में वन संरक्षण कानून में किए गए संशोधनों से जंगलों के प्रबंधन का निजीकरण शुरू हो गया है। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।
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जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि वन संरक्षण कानून में 2023 में किए गए संशोधनों से देश में जंगलों के प्रबंधन का निजीकरण शुरू हो गया है। पार्टी का कहना है कि यह बदलाव देश की वन नीति और पर्यावरण सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। कांग्रेस के महासचिव और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 2 जनवरी को जारी एक सर्कुलर साझा करते हुए यह आरोप लगाया।
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कानून में दूरगामी बदलाव
जयराम रमेश ने कहा कि अगस्त 2023 में मोदी सरकार ने वन संरक्षण अधिनियम, 1980 में संशोधन को संसद में जल्दबाजी में पारित कराया। इस दौरान न केवल कानून का नाम बदलकर वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम किया गया, बल्कि जंगलों के संचालन और प्रबंधन से जुड़े नियमों में भी बड़े और दूरगामी बदलाव किए गए। उनका कहना है कि उस समय ही यह आशंका जताई गई थी कि इन संशोधनों से निजी संस्थाओं को जंगलों में प्रवेश का रास्ता मिल जाएगा, और अब मंत्रालय के सर्कुलर से यह साफ हो गया है।



'यह तो बस शुरुआत है'
जयराम रमेश ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह तो केवल शुरुआत है और आने वाले समय में इससे जंगलों के व्यावसायिक उपयोग को और बढ़ावा मिल सकता है। कांग्रेस का आरोप है कि इससे पर्यावरण संरक्षण की मूल भावना कमजोर होगी।
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क्या कहता है मंत्रालय का सर्कुलर
सर्कुलर के अनुसार, यदि राज्य सरकारें सरकारी या गैर-सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर प्राकृतिक पुनरुत्पादन, वृक्षारोपण या वन प्रबंधन गतिविधियां संचालित करती हैं, तो इसे वन गतिविधि माना जाएगा। इस स्थिति में प्रतिपूरक वनीकरण और नेट प्रेजेंट वैल्यू का भुगतान जैसी शर्तें लागू नहीं होंगी। साथ ही, राज्य सरकारों को यह अधिकार भी दिया गया है कि वे इन गतिविधियों से होने वाले राजस्व का वितरण और साझा करने का ढांचा स्वयं तय कर सकें, जिससे जंगलों के व्यावसायिक और निजी प्रबंधन की राह खुल जाती है।
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