कांग्रेस ने मंगलवार को महाराष्ट्र सामान्य प्रवेश परीक्षा (एमएच-सीईटी) 2025-26 में बड़ी गड़बड़ी होने का आरोप लगाया। पार्टी का कहना है कि 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में बहुत कम अंक पाने वाले कई छात्रों ने इंजीनियरिंग और तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए होने वाली इस परीक्षा में लगभग पूरे अंक हासिल कर लिए। हालांकि, राज्य सरकार के सामान्य प्रवेश परीक्षा प्रकोष्ठ ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। उसका कहना है कि पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से हुई है और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं हुई।
सचिन सावंत ने क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने दावा किया कि बोर्ड परीक्षा में कम अंक पाने वाले कम से कम 22 छात्र एमएच-सीईटी 2025-26 के शीर्ष स्थान पाने वालों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह नीट-यूजी पेपर लीक विवाद जैसा गंभीर मामला है। सावंत ने कहा, जो छात्र 10वीं और 12वीं में केवल 35 से 40 प्रतिशत अंक ला पाए, उन्होंने एमएच-सीईटी में 100 प्रतिशत अंक हासिल कर लिए। यह बहुत गंभीर मामला है और इसकी पूरी जांच होनी चाहिए। जब किसी छात्र को 100 प्रतिशत अंक मिलते हैं, तो इसका मतलब होता है कि उसने लगभग 99.9 प्रतिशत अन्य छात्रों से ज्यादा अंक प्राप्त किए हैं। अपने आरोपों के समर्थन में सावंत ने कई उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि एक छात्र जिसने 10वीं में केवल 37 प्रतिशत अंक हासिल किए थे, उसने एमएच-सीईटी में 99.971 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।
उन्होंने दावा किया कि 12वीं में 51 प्रतिशत अंक पाने वाले दो छात्रों ने एमएच-सीईटी में 100 प्रतिशत अंक हासिल किए। वहीं, 45 प्रतिशत, 39 प्रतिशत और यहां तक कि 35 प्रतिशत अंक पाने वाले छात्रों ने भी 100 प्रतिशत अंक हासिल कर लिए। सावंत के अनुसार, एमएच-सीईटी गणित में रैंक 1, 2, 3, 4, 5, 6, 15, 16, 17 और 18 पर रहने वाले छात्रों ने 100 प्रतिशत हासिल किया, जबकि 12वीं की गणित की परीक्षा में उनके औसत अंक केवल 64.3 प्रतिशत थे।
उन्होंने कहा कि इनमें से छह छात्रों के अंक औसत से भी कम थे। इन छात्रों को 12वीं गणित में 60, 54, 53, 53, 40 और 35 अंक मिले थे। सावंत ने यह भी कहा कि एमएच-सीईटी के शीर्ष 20 छात्रों में से छह छात्रों के 12वीं के भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित (पीसीएम) में कुल अंक 60 प्रतिशत से कम थे। एक वह छात्र वह भी शीर्ष 20 में शामिल था, जिसके पीसीएम में केवल 39 प्रतिशत अंक थे।
उन्होंने एक और उदाहरण देते हुए कहा कि 66वीं रैंक पाने वाले छात्र को 10वीं गणित में 22 अंक और 12वीं गणित में 33 अंक मिले थे, लेकिन उसने एमएच-सीईटी में 99.971 प्रतिशत अंक हासिल किए। उस छात्र को 12वीं में पीसीएम में कुल अंक 47.67 प्रतिशत थे। सावंत ने कहा, बोर्ड परीक्षा और सीईटी के नतीजों में इतना बड़ा अंतर कई सवाल खड़े करता है। उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल को बताना चाहिए कि यह कैसे हुआ और परीक्षा प्रक्रिया को कौन नियंत्रित करता है।
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उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि नीट और एमएच-सीईटी जैसी परीक्षाओं से जुड़े लगातार विवाद चिंता की बात हैं। सावंत ने कहा कि वह एमएच-सीईटी के अधिकारियों को पूरे आंकड़ों के साथ एक नया पत्र भेजेंगे और मामले की तुरंत जांच की मांग करेंगे।
सीईटी प्रकोष्ठ ने आरोपों पर क्या कहा?
वहीं, महाराष्ट्र सरकार के सीईटी प्रकोष्ठ ने 2025-26 बी.ई/बी.टेक मेरिट लिस्ट में किसी भी तरह की गड़बड़ी के आरोपों को खारिज किया। सीईटी प्रकोष्ठ ने अपने बयान में कहा कि छात्रों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों को यह भरोसा दिलाया जाता है कि सीईटी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और इसमें किसी तरह का घोटाला या अनियमितता नहीं हुई है।