राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे।
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राहुल गांधी और खरगे ने यह कहा
अपने असहमति नोट में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने लिखा कि आयोग की संरचना समावेशिता और प्रतिनिधित्व पर काफी हद तक निर्भर करती है। समिति का काम यह तय करना है कि मानवाधिकार आयोग विभिन्न समुदायों, मानवाधिकार उल्लंघन का सामना करने वाले संवेदनशील लोगों के प्रति संवेदनशील बना रहे। इसलिए हमने योग्यता और समावेश की जरूरत देखते हुए अध्यक्ष पद के लिए न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन और न्यायमूर्ति कुट्टीयल मैथ्यू जोसेफ के नाम प्रस्तावित किए हैं। अल्पसंख्यक पारसी समुदाय के प्रतिष्ठित जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन अपनी बौद्धिक गहराई और सांविधानिक मूल्यों को लेकर प्रतिबद्धता के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी नियुक्ति से एनएचआरसी के बारे में एक मजबूत संदेश जाएगा।
इसी तरह से अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय से ताल्लुक रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस जोसेफ ने लगातार ऐसे फैसले दिए हैं, जिनमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता और हाशिए पर पड़े समूहों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है। इसलिए वह आयोग के अध्यक्ष पद के लिए एकदम सही उम्मीदवार हैं। वहीं सदस्यों के पद के लिए हमने जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस अकील अब्दुल हमीद कुरैशी के नामों की सिफारिश की। मानवाधिकारों की रक्षा करने का दोनों का ट्रैक रिकॉर्ड बेहतर है।
असहमति नोट में दोनों नेताओं ने लिखा कि आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति को लेकर योग्यता जरूरी है। लेकिन देश की क्षेत्रीय, जाति, समुदाय और धार्मिक विविधता में संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। इस संतुलन का प्रभाव होगा कि आयोग समावेशी दृष्टिकोण के साथ काम करेगा। लेकिन इन सब सिद्धांतों की अनदेखी करके समिति आयोग में जनता के विश्वास को खत्म करने का जोखिम उठा रही है। खरगे ने कहा कि बैठक में चयन समिति के बहुमत को बड़ा मानकर सिद्धांतों की अनदेखी करने का दृष्टिकोण बेहद खेदजनक है। हमने जो नाम प्रस्तावित किए हैं, वे आयोग के मूलभूत सिद्धांतों के अनुरूप हैं। उनको न मानना प्रक्रिया की निष्पक्षता के बारे में महत्वपूर्ण चिंता पैदा करता है।