नए कृषि कानूनों का पंजाब, हरियाणा, यूपी समेत देश के अन्य राज्यों में विरोध तेज हो गया है। कांग्रेस ने नए कृषि कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए एक आदर्श कानून का मसौदा तैयार किया है, जिसे पार्टी शासित राज्यों की विधानसभाओं में पारित किया जाएगा।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से पार्टी शासित राज्यों से केंद्रीय कृषि कानूनों को निष्प्रभावी करने वाले कानून बनाने के बारे में विचार करने को कहा गया था। कांग्रेस नेतृत्व ने पार्टी शासित राज्यों से कहा है कि वे संविधान के अनुच्छेद 254 (ए) के तहत कानून पारित करने के संदर्भ में गौर करें।
पार्टी का दावा है कि यह अनुच्छेद इन कृषि विरोधी व राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने वाले केंद्रीय कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए राज्य विधानसभाओं को कानून पारित करने का हक देता है। कांग्रेस ने इस कानून का मसौदा उस वक्त तैयार किया है, जब 4 अक्तूबर से पार्टी पंजाब और हरियाणा में ट्रैक्टर रैली निकालने जा रही है।
इसमें पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी शामिल होंगे। कांग्रेस ने शुक्रवार को गांधी जयंती के अवसर पर राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन की शुरुआत की। पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पुड्डुचेरी में कांग्रेस की सरकारें हैं। जबकि महाराष्ट्र और झारखंड में वह गठबंधन सरकार का हिस्सा है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा विरोधी दलों के शासन वाले राज्यों में भी कृषि कानूनों के खिलाफ कानून पारित किया जा सकता है।
कृषि कानूनों के विरोध में विपक्ष
हाल में संसद में पारित और कानून का रूप लेकर ले चुके तीन नए कृषि कानूनों का कांग्रेस के अलावा अकाली दल, सपा, बसपा, एनसीपी, राजद, टीएमसी समेत दूसरे विपक्षी दल मुखर विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस और एनसीपी के दबाव में बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र की उद्धव सरकार ने नए कृषि कानूनों पर रोक लगा दी है।
कर्नाटक में कांग्रेस का प्रदर्शन
कर्नाटक के मंगलोर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कृषि कानूनों के विरोध में शुक्रवार को प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ‘मिनी विधानसभा’ के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ नारेबाजी की। पार्टी कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम कर दिया। इसके बाद पुलिस ने हल्का बल का प्रयोग कर जाम खुलवाया और कुछ लोगों को गिरफ्तार कर लिया।