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अपने नेताओं का स्टिंग करा रही कांग्रेस, दिल्ली-लखनऊ आफिस पर इंटेलीजेंस तैनात

Thu, 22 Sep 2016 03:13 AM IST
पुनीत शर्मा/ अमर उजाला, मथुरा
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपने नेताओं की हकीकत परखने में लग गई है। इसके लिए बाकायदा दिल्ली और लखनऊ आफिस पर अपनी इंटेलीजेंस तैनात की गई है। यह इंटेलीजेंस कांग्रेस नेताओं की ओर से दी जाने वाली संगठन के गठन की रिपोर्ट पर क्रास चेकिंग कर रही है। बूथ कमेटियों के सदस्यों को सीधे फोन किया जा रहा।
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उनसे पूछा जा रहा है कि क्या आपको सदस्य बनाया गया है। यदि बनाया है तो किसने। इस बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बूथ स्तर तक संगठन को खड़ा करने की प्लानिंग है। इसके लिए नेताओं को टारगेट दिए गए हैं। हर विधानसभा में जाकर किसान मांग पत्र भरवाए जा रहे हैं। हर बूथ पर छह सदस्यों की टीम बनाई जा रही है।

इसके हर सदस्य का नाम और मोबाइल नंबर मुख्यालय को भेजा गया है। किसानों के नाम और मोबाइल नंबर की सूची भी कांग्रेस हेडक्वार्टर को पहुंचा दी गई है। अब मुख्यालय से इनकी हकीकत पता की जा रही है। मथुरा की हर विधानसभा में इस प्रकार के फोन पदाधिकारियों के पास पहुंचे हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष सोहन सिंह सिसौदिया ने बताया कि दिल्ली और लखनऊ से फोन करके पूछा जा रहा है। अब संगठन में गठन के नाम पर कोई झूठ नहीं बोल सकेगा।
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कांग्रेस मुख्यालय से पूछे जा रहे यह सवाल

- क्या आपको पता है कि आप कांग्रेस के सदस्य बने हैं।
- क्या आप जानते हैं कि कांग्रेस किन मुद्दों पर चुनाव लड़ रही है।
- आपके मुहल्ले, गांव या घर पर कांग्रेस के नेता कभी आए हैं।
- कांग्रेस नेताओं ने आपके किन-किन मुद्दों को लेकर संघर्ष किया।
- कांग्रेस की किसी मीटिंग के लिए आपके पास सूचना आई या नहीं।
- ‘27 साल यूपी बेहाल’ यात्रा के बारे में कोई जानकारी आपको दी गई।
  
फाल्स रिपोर्टिंग में फंस गए कई जिले
फाल्स रिपोर्टिंग में कई जिले फंस गए हैं। इन जिलों से मुख्यालय को भेजी गई बूथ कमेटियों में तमाम नाम ऐसे पाए गए जिन्हें नेताओं ने घर बैठकर ही कार्यकर्ता बना दिया था। इस पर पार्टी हाईकमान ने चेतावनी भी जारी कर दी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कई जिलाध्यक्षों को हटाया भी जा सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 10 और पूर्वांचल के सात जिले इस दायरे में आ रहे हैं।

किसानों साथ सेल्फी भी
किसान मांग पत्र भरवाने वाले विधायक, पार्टी प्रत्याशी या फिर दावेदारों को किसानों के साथ सेल्फी भी लेनी होगी। मुख्यालय से कहा गया है कि जिस गांव में भी जाएं वहां पहले फार्म भरवाया जाए और बाद में सभी किसानों को इकट्ठा करके उनके साथ सेल्फी ली जाए। यदि कोई बगैर सेल्फी वाली रिपोर्ट भेजेगा तो उसे गलत मान लिया जाएगा।
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