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टला मगर खत्म नहीं हुआ कांग्रेस का विवाद, पूरी लड़ाई में कमजोर पड़े राहुल

Tue, 25 Aug 2020 02:00 AM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Rahul Gandhi, Sonia Gandhi, Priyanka Gandhi (file photo) - फोटो : PTI
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कांग्रेस में राहुल गांधी समर्थक बनाम विरोधी खेमे के बीच जारी मुकाबला सोमवार को टाई रहा। पार्टी का संकट टल जरूर मगर खत्म नहीं हुआ। भविष्य में जब कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी का विकल्प तलाशेगी तब अंतर्कलह फिर बाहर आएगी। हालांकि इस विवाद में सबसे अधिक कमजोर पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पड़े हैं। ऐसे में भविष्य में उनके लिए अपनी पसंद के व्यक्ति को अध्यक्ष बनाना आसान नहीं होगा।

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राहुल विरोधी खेमे का मानना है कि भले विवाद टालने की लिए कमेटी बना दी गई, मगर इससे समाधान निकलना संभव नहीं है। यक्ष प्रश्न यह है कि सोनिया की जगह पार्टी की कमान किसके हाथ हो। पार्टी का एक धड़ा न तो राहुल की दोबारा ताजपोशी चाहता है और न उनकी पसंद पर सहमति देना चाहता है। ऐसे में या तो भविष्य में इस मुद्दे पर फिर टकराव होगा या पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी के लिए सियासी जमीन तैयार की जाएगी। 

राहुल गांधी की कार्यशैली पार्टी के एक धड़े को बेहद नागवार गुजर रही है। पार्टी के 23 नेताओं की ओर से भेजे गए पत्र का कारण भी राहुल ही थे। अब कार्यसमिति की बैठक के बाद राहुल की पार्टी में स्थिति कमजोर हुई है। बैठक की शुरुआत में उन्होंने पत्र लिखने वालों पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाया और फिर कपिल सिब्बल को सफाई दी। उससे उनकी कमजोर स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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विरोधियों को किनारे नहीं कर पाए राहुल
बैठक की शुरुआत में योजना राहुल गांधी के विरोधी नेताओं को किनारे करने की थी। इसी रणनीति के तहत सोनिया ने अंतरिम अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश की। इसके बाद राहुल ने पत्र लिखने वाले नेताओं पर निशाना साधा। भले पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, एके एंटनी जैसे नेताओं ने सोनिया के समर्थन में कसीदे पढ़े, मगर अंत में सोनिया को कहना पड़ा कि उनके मन में पत्र लिखने वालों के प्रति दुर्भावना नहीं है।

बड़ा सवाल-कौन संभालेगा पार्टी की कमान
विवाद टालने के लिए कमेटी बनाने की घोषणा हुई है। यह संगठन के कामकाज पर उठाए गए सवालों की पड़ताल करेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि कमेटी में किस गुट के नेता का पलड़ा भारी रहता है। हालांकि राहुल विरोधी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि कमेटी समाधान नहीं है। सवाल यह है कि पार्टी की कमान कौन संभालेगा और पार्टी भविष्य में किस तरह की कार्यशैली अपनाएगी।

प्रियंका के लिए तैयार हो सकती है जमीन
राहुल विरोधी धड़ा मानता है कि इस समय गांधी परिवार के इतर कोई पार्टी नहीं संभाल सकता। राहुल की पंसद वेणुगोपाल या किसी अन्य नेता के हाथ में कमान जाने से स्थिति और बिगड़ेगी। ऐसे में छह महीने में प्रियंका गांधी को संगठन की कमान देने की पटकथा तैयार की जा सकती है। शुरुआती दौर में नए अध्यक्ष की मदद के लिए दो वरिष्ठ नेताओं को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
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