केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन यूडीएफ ने दस साल के लंबे इंतजार के बाद सत्ता में बहुत ही शानदार वापसी की। नौ अप्रैल को हुए चुनाव में 140 सीटों वाली विधानसभा में गठबंधन ने 102 सीटों पर कब्जा जमाकर इतिहास रचा। इस चुनाव में कुल 2.15 करोड़ वोट पड़े थे। इनमें से एक करोड़ से ज्यादा वोट सिर्फ यूडीएफ को मिले हैं। लेकिन इस बड़ी जीत का जश्न मनाने के साथ ही अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।
क्या वी.डी. सतीसन को मिलेगा जनता और सहयोगियों का साथ?
बिना चुनाव लड़े भी केसी वेणुगोपाल रेस में कैसे हैं सबसे आगे?
पार्टी की ऐतिहासिक जीत में वेणुगोपाल की क्या रही है भूमिका?
वेणुगोपाल के करीबियों का दावा है कि इस जीत के पीछे असली मेहनत उन्हीं की है और उन्होंने चुनाव में बहुत अहम भूमिका निभाई है। राज्य में 'इंदिरा गारंटी' अभियान को घर-घर तक पहुंचाने और सफल बनाने में उनकी सबसे बड़ी भूमिका रही। उन्होंने ही पूरे राज्य में लोगों के बीच सर्वे कराकर एकदम सही उम्मीदवारों का चुनाव किया। चुनाव के दौरान पार्टी के अंदर चल रहे झगड़ों को दूर करने, बागियों को रोकने और तीन स्तर की निगरानी प्रणाली बनाने का काम भी उन्होंने ही किया। वेणुगोपाल ने ही सभी सहयोगी दलों को एक साथ जोड़े रखा और सीपीआई (एम) के नाराज नेताओं को अपने गठबंधन में शामिल किया।
कुर्सी के लिए तेज हुई गुटबाजी, अब क्या करेगा कांग्रेस आलाकमान?
कुर्सी की इस रेस में शामिल तीनों नेताओं के समर्थक अब पूरी तरह से खुलकर आमने-सामने आ गए हैं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में समर्थक अपने-अपने नेताओं को मुख्यमंत्री बनाने की मांग वाले पोस्टर लगा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी तीनों नेताओं के पक्ष में बहुत ही जोरदार अभियान चलाया जा रहा है। एर्नाकुलम में सतीसन और नई दिल्ली में वेणुगोपाल के सम्मान में बड़े-बड़े स्वागत समारोह भी रखे गए हैं। अब पूरे राज्य की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आलाकमान विधायकों की राय जानने के बाद इन तीनों दिग्गजों में से किसके सिर पर केरल के मुख्यमंत्री का ताज पहनाता है।