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वार: 'मोदी सरकार के पिछले 10 साल के कार्यकाल में निजी निवेश का ‘डबल इंजन’ पटरी से उतरा', कांग्रेस का बड़ा दावा

Sun, 10 Nov 2024 12:13 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जयराम रमेश ने कहा कि समय बीतने के साथ ही भारत के घटते उपभोग की त्रासदी अधिक स्पष्ट होती जा रही है। नाबार्ड के एनएएफआईएस 2021-22 के नए आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत के मांग संकट की वजह लगातार आय में स्थिरता है।
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कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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कांग्रेस ने एक बार फिर मोदी सरकार पर हमला बोला। मुख्य विपक्षी दल ने रविवार को दावा किया कि भारत लगातार आय में स्थिरता के कारण ‘मांग संकट’ का सामना कर रहा है। साथ ही कहा कि संप्रग सरकार के दौरान लगातार जीडीपी वृद्धि को गति देने वाला निजी निवेश और व्यापक उपभोग का ‘डबल इंजन’ मोदी सरकार के पिछले 10 साल के कार्यकाल में पटरी से उतर गया है।

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कांग्रेस के इन प्रस्तावों को स्वीकारे केंद्र 
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सरकार से कहा कि वह कांग्रेस के प्रस्तावों को स्वीकार करे, जिसमें ग्रामीण भारत में आय वृद्धि को गति देने के लिए मनरेगा मजदूरी को न्यूनतम 400 रुपये प्रतिदिन तक बढ़ाना, किसानों के लिए एमएसपी और ऋण माफी की गारंटी देना तथा महिलाओं के लिए मासिक आय सहायता योजना शामिल हैं।

मांग संकट की वजह लगातार आय में स्थिरता
उन्होंने कहा कि समय बीतने के साथ ही भारत के घटते उपभोग की त्रासदी अधिक स्पष्ट होती जा रही है। पिछले सप्ताह, भारतीय उद्योग जगत के कई सीईओ ने ‘सिकुड़ते’ मध्य वर्ग पर चिंता जताई थी और अब नाबार्ड के अखिल भारतीय ग्रामीण वित्तीय समावेशन सर्वेक्षण (एनएएफआईएस) 2021-22 के नए आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत के मांग संकट की वजह लगातार आय में स्थिरता है।
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किसकी-कितनी आय?
रमेश ने सर्वेक्षण के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि औसत मासिक घरेलू आय कृषि परिवारों के लिए 12,698 रुपये से 13,661 रुपये और गैर-कृषि परिवारों के लिए 11,438 रुपये है। उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अनुमानित प्रति व्यक्ति आय 2,886 रुपये प्रति माह है, जो प्रतिदिन 100 रुपये से भी कम है। इसलिए ज्यादातर भारतीयों के पास बुनियादी जरूरतों के अलावा विवेकाधीन उपभोग के लिए बहुत कम पैसा है।

उन्होंने दावा किया, 'लगभग हर तथ्य इसी निष्कर्ष की ओर इशारा करते हैं कि औसत भारतीय आज 10 साल पहले की तुलना में कम खरीद सकता है। यह भारत की खपत में मंदी का मूल कारण है।'

मनमोहन सिंह के कार्यकाल में बढ़ी मजदूरों की मजदूरी
श्रम ब्यूरो के वेतन दर सूचकांक के आंकड़ों का हवाला देते हुए, रमेश ने कहा कि 2014 से 2023 के बीच मजदूरों की वास्तविक मजदूरी स्थिर रही और वास्तव में 2019 से 2024 के बीच इसमें गिरावट आई। उन्होंने कृषि मंत्रालय के कृषि सांख्यिकी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल में कृषि मजदूरों की वास्तविक मजदूरी हर साल 6.8 प्रतिशत बढ़ी।

रमेश ने कहा, मोदी के कार्यकाल में कृषि मजदूरों की वास्तविक मजदूरी हर साल -1.3 प्रतिशत घटी। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण श्रृंखला के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि समय के साथ औसत वास्तविक आय 2017 से 2022 के बीच स्थिर रही है।

उन्होंने सेंटर फॉर लेबर रिसर्च एंड एक्शन के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि ईंट भट्टों में काम करने वाले श्रमिकों की वास्तविक मजदूरी 2014 से 2022 के बीच स्थिर रही या कम हो गई। उन्होंने कहा कि खपत में यह मंदी हमारी मध्यम अवधि और दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता को नष्ट कर रही है। कांग्रेस नेता ने दलील दी कि खपत में पर्याप्त वृद्धि के बिना भारत का निजी क्षेत्र नए उत्पादन में निवेश करने के लिए इच्छुक नहीं होगा।
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