कांग्रेस नेता आरके धवन के अंतिम संस्कार पर यूपीए चेयरपर्सन और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निजी सचिव रहे धवन का पार्थिव शरीर कांग्रेस मुख्यालय में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। इस दौरान सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने धवन के परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया।
बता दें कि 81 वर्षीय धवन काफी समय से बीमार चल रहे थे। एक समय उन्हें कांग्रेस और सरकार के शक्तिशाली लोगों में गिना जाता था।
1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के भी वह प्रत्यक्षदर्शी थे। वह इंदिरा गांधी के करीब आने के बाद से अंतिम वक्त तक उनके साथ रहे। उनका जन्म 16 जुलाई 1937 को पाकिस्तान के चिनोट में हुआ था। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत में आकर बस गया था।
उन्होंने कर्नल ब्राउन कैंब्रिज स्कूल, देहरादून और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई की थी। आपातकाल के दौरान वह सत्ता के अहम स्तंभ बनकर उभरे थे और इंदिरा गांधी तक सूचना पहुंचाने में उनकी बड़ी भूमिका थी।
इस दौरान होने वाली प्रशासनिक नियुक्तियों में भी उनकी दखलंदाजी थी। हालांकि इंदिरा गांधी की मौत के बाद राजीव गांधी ने उन पर भरोसा नहीं किया और उन्हें सभी अहम पदों से हटा दिया।
आपातकाल के लिए वह संजय गांधी को दोषी मानते थे। वह राज्यसभा सांसद भी रहे थे। अपनी बीमारी के दौरान देखभाल करने वाली अचला मोहन से 2012 में शादी करने को लेकर वह काफी सुर्खियों में रहे थे। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक प्रकट किया है।