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Congress: केंद्रीय विवि में नियुक्ति को लेकर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, कहा- OBC, SC-ST को नहीं दी नौकरियां

Sun, 27 Jul 2025 06:07 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने पिछले सप्ताह संसद में शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार के नियुक्ति को लेकर दिए गए लिखित उत्तर का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने आरक्षित वर्गों के खिलाफ उपयुक्त नहीं पाए जाने वाले प्रावधान का हथियार बनाकर इस्तेमाल किया।
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कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए रिक्त आरक्षित पदों पर नियुक्ति को लेकर कांग्रेस ने केंद्र को घेरा। कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने इन आरक्षित वर्गों को नौकरियां नहीं दीं। साथ ही इनके खिलाफ उपयुक्त नहीं पाए जाने वाले प्रावधान का हथियार बनाकर इस्तेमाल किया गया।
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कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने पिछले सप्ताह संसद में शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार के नियुक्ति को लेकर दिए गए लिखित उत्तर का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में मोदी सरकार ने केंद्रीय विवि में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित संकाय पदों पर रिक्तियों के चौंका देने वाले स्तर का खुलासा किया है।

इसमें कहा गया कि प्रोफेसर स्तर पर ओबीसी के लिए 80 फीसदी पद, एसटी के लिए 83 फीसदी पद और एससी के लिए 64 फीसदी पद रिक्त हैं। सामान्य श्रेणी में रिक्तियां 39 फीसदी  हैं। एसोसिएट प्रोफेसर स्तर पर ओबीसी के लिए 69 फीसदी  पद, एसटी के लिए 65 फीसदी पद और एससी के लिए 51 फीसदी पद रिक्त हैं। सामान्य श्रेणी में रिक्तियां 16 फीसदी हैं।
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उन्होंने कहा कि सहायक प्रोफेसर स्तर पर ओबीसी के लिए 23 फीसदी पद, एसटी के लिए 15 फीसदी पद और एससी के लिए 14 फीसदी पद रिक्त हैं। सामान्य श्रेणी में रिक्तियां केवल 8 फीसदी हैं। रमेश ने कहा कि सरकार ने दावा किया है कि वह संकाय पदों के लिए भर्ती के दौरान उपयुक्त नहीं पाए जाने (एनएफएस) की व्यापकता पर केंद्रीय रूप से डाटा एकत्र नहीं करती है, लेकिन इस डाटा से सब स्पष्ट है।

उन्होंने तर्क दिया कि सामान्य श्रेणी के पदों की तुलना में आरक्षित पदों में रिक्तियों का उच्च स्तर स्पष्ट रूप से इन उम्मीदवारों के लिए एनएफएस के अधिक प्रचलन की ओर इशारा करता है। यह मुद्दा राहुल गांधी ने भी उठाया है। उन्होंने कहा कि एनएफएस को एससी, एसटी और ओबीसी उम्मीदवारों के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि उन्हें उचित रोजगार के अवसरों से वंचित किया जा सके और सार्वजनिक रोजगार में आरक्षण के सांविधानिक प्रावधान को खत्म किया जा सके।

सरकार ने संसद में दिया था जवाब
23 जुलाई को राज्यसभा में शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा था कि प्रोफेसर के पद के लिए अनुसूचित जाति समुदाय के लिए आरक्षित 308 सीटों में से 111 सीटें भर ली गई हैं। अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए आरक्षित 144 सीटों में से 24 सीटें भर ली गई हैं और पिछड़ा वर्ग के लिए 423 सीटों में से 84 सीटें भर ली गई हैं।

एसोसिएट प्रोफेसर के लिए अनुसूचित जाति के लिए 632 पदों में से 308 भरे जा चुके हैं। अनुसूचित जनजाति के लिए 307 पदों में से 108 भरे जा चुके हैं। तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 883 पदों में से 275 भरे जा चुके हैं। उन्होंने बताया था कि सहायक प्रोफेसर के लिए अनुसूचित जाति के लिए 1,370 पदों में से 1,180 पद भरे जा चुके हैं; अनुसूचित जनजाति के लिए 704 पदों में से 595 पद भरे जा चुके हैं; तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 2,382 पदों में से 1,838 पद भरे जा चुके हैं।
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