कांग्रेस पार्टी के नेता जयवीर शेरगिल ने केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा लोगों के निजी कंप्यूटरों में मौजूद डाटा पर नजर रखने और उसे जांचने का अधिकार दस एजेंसियों को देने के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। उन्होंने कहा, चौंकीदार अब जासूस भी हो गया है। वे गैर-कानूनी एवं असंवैधानिक तरीके से घर-घर की निजी बातचीत सुनना चाहते हैं। शुक्रवार को एक प्रेसवार्ता में शेरगिल ने कहा, मोदी सरकार का पिछले चार साल का ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो उसे ताक-झांक और जासूसी करने की लत लग चुकी है। इस तुगलकी फरमान के जरिए वे लोकतंत्र को मोदी तंत्र बनाना चाहते हैं।
सरकार के आदेशों के मुताबिक, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 के तहत यदि सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों को किसी संस्थान या व्यक्ति पर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने का संदेह होता है तो वे उनके कंप्यूटरों में मौजूद सामग्रियों को जांच सकती हैं। शेरगिल का कहना है कि यह सीधे तौर पर आईटी एक्ट 2000 का उल्लंघन है। एक्ट में कहा गया है कि इस तरह किसी के कंप्यूटर से डॉटा चोरी करना या फोन टेपिंग नहीं की जा सकती। इसके लिए कुछ शर्तें दी गई हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है। पहला, इस तरह की जांच केस बाई केस, जनहित में, अखंडता को खतरा हो या फिर सुरक्षा, हमला व अन्य किसी अपराध के अंदेशे के मद्देनजर हो सकती है।
मोदी सरकार ने जो आदेश जारी किए हैं, उसमें ऐसा कुछ नहीं कहा गया है कि खतरा किससे है। क्या उन्हें अपने लोगों से कोई डर है। उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि वे किस अपराध को रोकने के लिए ऐसा ऑर्डर जारी कर रहे हैं। यह आदेश तो मोदी के हित में जारी किया गया है। इसका जनता से कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेसी नेता ने कहा, मोदी को अब वोट की चोट का खतरा दिख रहा है, इसलिए वे ऐसे आदेश जारी करा रहे हैं।
9 जजों की बैंच ने सरकार और लोगों के बीच संवैधानिक दीवार खड़ी की थी...
शेरगिल ने कहा, मोदी सरकार का यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के 547 पन्ने वाले 'निजता के अधिकार' के फैसले की धज्जियां उड़ा रहा है। नौ जजों की बैंच ने निजता के अधिकार पर फैसला देते वक्त कहा था कि हम सरकार और जनता के बीच एक संवैधानिक दीवार खड़ी कर रहे हैं। यह इसलिए कर रहे हैं ताकि सरकार, जनता के निजी मामलों में ताक-झांक न कर सके। अब मोदी ने वह दीवार गिरा दी है।
सरकार के इस आदेश की वजह से हिन्दुस्तान अब एक पुलिस और सर्विलांस स्टेट बन गया है। कांग्रेस पार्टी की मांग है कि इस तुगलकी फरमान को वापस लिया जाए। अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो कांग्रेस पार्टी जनता के बीच जाएगी और इसे अदालत में चुनौती देने के कानूनी पहलुओं पर भी विचार करेगी।