2019 में राफेल फाइटर प्लेन को लेकर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र की मोदी सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा था। पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी ने राजनीति के विभिन्न मंचों से भाजपा पर हमला बोला। चूंकि यह मामला देश की सुरक्षा के साथ जुड़ा था, इसलिए सुप्रीम कोर्ट में भी इसे लेकर सुनवाई हुई। हालांकि सर्वोच्च अदालत ने अपने फैसले में मोदी सरकार को क्लीन चिट दे दी थी।
अब एक बार फिर कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार को घेरने के लिए तैयार है। बुधवार को कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने एक प्रेसवार्ता में पनडुब्बी परियोजना को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोल दिया है। उनका आरोप है कि सरकार 45 हजार करोड रुपये के पनडुब्बी परियोजना सौदे में पक्षपात कर रही है। इसमें क्रोनी पूंजीवाद का समर्थन, रक्षा खरीद प्रक्रिया 2016 का उल्लंघन और कथित तौर पर भारतीय नौसेना एवं इसकी अधिकार प्राप्त समिति को बाईपास करने जैसी बातें सामने आ रही हैं।
बुधवार को एक प्रेसवार्ता में सुरजेवाला ने ये आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उक्त उल्लंघनों के चलते 45 हजार करोड रुपये का पनडुब्बी परियोजना पर संदेह की रडार घूम रही है। कांग्रेस नेता का आरोप था कि मोदी सरकार कथित तौर पर यह सौदा भी देश के एक बड़े उद्योगपति को सौंप रही है। हालांकि इस बाबत सुरजेवाला सीधे तौर पर कुछ बताने से हिचकते रहे। उनका कहना था कि कुछ सवाल आपको अब भाजपा से पूछने होंगे।
हमने इस मुद्दे को लाल झंडी दिखा दी है, कुछ सवाल उनसे भी पूछे जाने की जरूरत है। मुझे पता है कि वे प्रेस या मीडिया के प्रति जवाबदेह नहीं हैं, लेकिन कभी-कभार उनसे पूछने की आवश्यकता होती है। कांग्रेस नेता से सवाल किया गया कि आप यह कैसे कह सकते हैं कि ये डील रक्षा मंत्रालय अडानी डिफेंस को देने वाला है। इस पर सुरजेवाला बोले, मैंने ये कहा कि ऐसा लगता है। हमें भी यह जानकारी मीडिया से ही मिली है।
रक्षा मंत्रालय के समक्ष यह मामला शुक्रवार तक संज्ञान में आ जाएगा, शुक्रवार को नहीं सोमवार तक आ जाएगा। इस बाबत कोई तिथि निर्धारित नहीं है। कांग्रेस पार्टी का केवल इतना कहना है कि भारत सरकार, प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्रालय, जैसी बड़ी संस्थाएं किसी विशेष इकाई को खारिज करने वाली भारतीय नौसेना की अधिकार प्राप्त समिति द्वारा लिए गए एक सचेत निर्णय को मानती है या नहीं। वे चाहें तो इसे पलट भी सकते हैं।
अगर इस सौदे में कुछ भी ऐसा वैसा नहीं है तो प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री आगे आकर देश को बताएं और कहें, नहीं इसमें कुछ भी गलत नहीं है। ऐसा कुछ भी नहीं किया जा रहा है। उनके इस जवाब में हम सब संतुष्ट हो जाएंगे।