आम आदमी पार्टी के गांधीनगर से विधायक अनिल वाजपेयी आज अरविंद केजरीवाल का साथ छोड़ भाजपा में शामिल हो गए। इसके पहले अन्ना आंदोलन के समय अरविंद केजरीवाल के साथी रहे किरण बेदी और जनरल वीके सिंह जैसे लोग भी उनका साथ छोड़ बीजेपी में अपना ठिकाना बना लिया है। करावल नगर से आप विधायक कपिल मिश्रा और कुमार विश्वास भी भाजपा के संपर्क में बताए जाते हैं।
आप नेताओं के इस तरह बीजेपी में शामिल होने पर तीखी टिप्पणी करते हुए कांग्रेस नेता जितेंद्र कोचर ने कहा है कि उनका यह आरोप सही साबित हुआ है कि आप बीजेपी की बी टीम है। उन्होंने आरोप लगाया कि आप बीजेपी से बाहर रहकर भी वही काम कर रही थी जिसे करने का इशारा उसे भाजपा से मिल रहा था।
इस आरोप पर दिल्ली भाजपा प्रवक्ता नवीन कुमार का कहना है कि सच तो यह है कि आप के बनने के बाद सबसे ज्यादा कांग्रेस के नेता-कार्यकर्ता ही अरविंद केजरीवाल के साथ हो गए थे। लेकिन अगर कांग्रेस को इस बात का यकीन है कि आप बीजेपी के साथ है तो उसे इस बात का भी जवाब देना चाहिए कि उसके नेता अरविंद केजरीवाल के साथ गठबंधन करने के लिए क्यों परेशान थे?
आज जब लोगों को यह पता चल गया है कि आम आदमी पार्टी अपने राजनीतिक अवसान पर है तब वह अपने अस्तित्व के लिए कांग्रेस के पास ही ठिकाना क्यों खोज रही थी। नवीन कुमार के मुताबिक, चुनाव के समय कार्यकर्ता विभिन्न कारणों से पार्टी छोड़ते हैं। आरोप लगाने की बजाय राजनीतिक दलों को अपने ऊपर विचार करना चाहिए।
कांग्रेस में भी जमीन तलाश चुके थे अनिल वाजपेयी
सूत्रों से पता चला है कि गांधीनगर से आप विधायक अनिल वाजपेयी भाजपा में शामिल होने से पहले कांग्रेस में जाने की संभावना तलाश चुके थे। पूर्वी दिल्ली से कांग्रेस उम्मीदवार अरविंदर सिंह लवली से उनकी बातचीत भी हो चुकी थी, इसके लिए कांग्रेस की तरफ से एक बड़ी हस्ती के कांग्रेस में शामिल होने की बात मीडिया में बता भी दी गई थी, लेकिन इसी बीच भाजपा के एक नेता की सक्रियता के कारण वे भाजपा के खेमे में चले गए।
बताया जाता है कि आप नेता मनीष सिसोदिया को अनिल वाजपेयी के इस पाला बदल की भनक मिल चुकी थी। यही वजह है कि उन्होंने एक दिन पूर्व ही एक प्रेस कांफ्रेस के जरिए भाजपा पर उसके सात विधायकों को खरीदने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। इस पर बीजेपी नेता विजय गोयल ने पलटवार करते हुए कहा था कि आप के चौदह विधायक उनके संपर्क में हैं।