यूपीए चेयरमैन को लेकर कांग्रेस और शिवसेना में तकरार बढ़ गई है। शरद पवार को यूपीए अध्यक्ष बनाने के शिवसेना के प्रस्ताव पर ज्यादातर विपक्षी दल सहमत हैं। उन्हें इससे यूपीए का कुनबा बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, कांग्रेस को अपना अधिकार छिनता दिख रहा है। इस पर कांग्रेेस और शिवसेना के नेताओं में जुबानी जंग छिड़ गई है।
यूपीए में सबसे बड़ा दल होने के नाते कांग्रेस अध्यक्ष इसका चेयरमैन होता है। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी अस्वस्थ हैं और ऐसे में यदि राहुल गांधी अध्यक्ष बनते हैं तो यूपीए के अधिकतर घटक दल उनके नेतृत्व में असहज महसूस करेंगे।
इसीलिए उनको लगता है कि पवार के यूपीए अध्यक्ष बनने से न सिर्फ यूपीए मजबूत होगा, बल्कि उसमें तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना जैसी दूसरी पार्टियां भी शामिल हो सकती हैं। भाजपा से अलग होकर शिवसेना भी एक ऐसा प्लेटफार्म तलाश रही है।
शिवसेना शरद पवार को आगे कर कांग्रेस नेतृत्व को भी घेरना चाहती है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का उद्धव ठाकरे को दलितों से जुड़े मुद्दों पर पत्र लिखकर उन्हें न्यूनतम साझा कार्यक्रम की याद दिलाना भी इसी प्रस्ताव से जोड़कर देखा जा रहा है।