कांग्रेस ने जज लोया के मामले में फैसला आने के बाद अपने मंच से चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग पर फिलहाल कुछ कहने से इंकार कर दिया लेकिन आज बुलाई गई विपक्षी दलों की बैठक में इस पर नए सिरे से चर्चा संभावित है। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने विपक्षी दलों के सभी प्रमुख नेताओं को आमंत्रित किया है। बैठक में विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा कर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की जानी है।
विपक्षी दलों के नेता संसद स्थित राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के कमरे में जुटेंगे। जानकारी के मुताबिक विपक्षी दलों की बैठक देश की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के लिए बुलाई गई है। जज लोया की मौत पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आयोजित इस बैठक में एक बार फिर संभावना तलाशी जाएंगी कि क्या चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग लाना उचित है। दरअसल इसे लेकर सभी विपक्षी दल एकमत नहीं हैं वहीं कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं की राय भी इसके खिलाफ है। हालांकि महाभियोग लाने के लिए पर्याप्त सांसदों की संख्या पूरी है और हस्ताक्षर भी कराए जा चुके हैं।
विपक्षी दलों के सामने सबसे अहम मुद्दा एससी-एसटी एक्ट को लेकर आए फैसले के बाद राज्यों में उत्पन्न स्थिति पर चर्चा और सरकार पर संसद में ऑर्डिनेंस लाने का दबाव की रणनीति बनेगी। कांग्रेस के एससी-एसटी प्रकोष्ठ की ओर से 23 अप्रैल को दिल्ली में संविधान बचाओ कार्यक्रम की शुरूआत होनी है। कांग्रेस चाहती है कि अन्य दल अपने-अपने तरीके से इस मुद्दे पर अपनी बात रखें। देश की कानून व्यवस्था खासकर उन्नाव और कठुआ की घटनाओं के बाद भी इस तरह की घटनाओं पर सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा होगी।
कांग्रेस 29 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली कर रही है। कांग्रेस विपक्षी दलों को भी टटोलना चाहती है और अगर सहमति बनती है तो विपक्षी पार्टियां भविष्य में राष्ट्रीय मुद्दों पर एक साथ रैलियां कर सकती हैं।
पवार से मिलकर राहुल ने संयुक्त विपक्षी मोर्चे पर किया विचार
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने देश के मौजूदा राजनीतिक हालात और 2019 के संसदीय चुनाव में भाजपा को हराने के लिए सभी विपक्षी दलों को एकजुट रखने के लिए चर्चा की। सूत्रों ने बताया कि पवार के आवास पर दोनों नेताओं के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बैठक चली।