कांग्रेस राज्यों के मुख्यमंत्री कमलनाथ, भूपेश बघेल, अशोक गहलोत के अलावा विपक्ष के नेताओं में डीएमके के एमके स्टानिल, जद (एच) के एचडी कुमारस्वामी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, बसपा की सुश्री मायावती, शरद यादव, राजद के तेजस्वी यादव भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे।
झारखंड के मुख्यमंत्री की सरकार सही मायनों में विपक्ष की गठबंधन की सरकार है। इसकी ताजपोशी भी ग्रैंड बनाकर सत्तारुढ़ भाजपा को बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी है। इससे पहले हाल में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी शपथ ली है। उद्धव का शपथ लेना भाजपा की छाती पर मूंग दलने जैसा था। महाराष्ट्र को धीरे-धीरे अपना गढ़ बनाने में लगी भाजपा के लिए बड़ा झटका इसलिए भी था कि सत्तारुढ़ दल ने विधानसभा चुनाव शिवसेना के साथ मिलकर लड़ा था।
अंतिम समय में शिवसेना ने भाजपा का साथ छोड़ दिया। इसके बाद भी भाजपा ने सरकार बनाने की पूरी कसरत की, लेकिन 40 घंटे बाद ही उसके मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को पद से इस्तीफा देना पड़ा था। वहीं झारखंड में गठबंधन के आगे सत्तारुढ़ दल की करारी हार हुई है। इसलिए उत्साह से लबरेज विपक्ष समारोह को शानदार तरीके से पूरा करना चाहता है।
2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद भाजपा का विजय रथ बढ़ चला था। भाजपा-गठबंधन 19 से अधिक राज्यों में सरकार बना ली थी, लेकिन धीरे-धीरे एक के बाद एक राज्य भाजपा की पकड़ से बाहर होते जा रहे हैं। भाजपा को पहला बड़ा झटका पिछले तीन राज्यों (छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश) के एक साथ बाहर आने से लगा। इसके बाद भाजपा लोकसभा चुनाव 2019 में शानदार सफलता लेकर आई, लेकिन हरियाणा, महाराष्ट्र के चुनाव ने उनके आत्मबल पर बुरा असर डाला।