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केरल : अब 'राम और रामायण' के जरिए भाजपा और आरएसएस को रोकेगी कांग्रेस-सीपीएम

Sat, 14 Jul 2018 11:26 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
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देश में चुनाव आते ही हिंदुत्व का एजेंडा जोर पकड़ने लगता है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) तो पहले से ही हिंदुत्व का झंडा लिए खड़े हैं और अब इस कड़ी में कांग्रेस और सीपीएम भी जुड़ गए हैं। केरल में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। दरअसल, केरल की राजनीति भी अब राम और रामायण के सहारे चलने लगी है। राज्य के दो प्रमुख राजनीतिक दल सीपीएम और कांग्रेस 'राम' के सहारे एक दूसरे को पछाड़ने में लगे हुए हैं। इस कार्यक्रम का एक प्रमुख लक्ष्य ये भी है कि कैसे भाजपा और आरएसएस के बढ़ते प्रभाव को रोका जाए।
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बता दें कि केरल में 17 जुलाई से 'रामायण मास' का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान राज्य के अधिकतर हिंदू घरों में रोज महाकाव्य का पाठ होता है। हिंदुओं का ऐसा मानना है कि मानसून के साथ आने वाली बीमारियों और अन्य समस्याओं से ये उनकी रक्षा करता है। सीपीएम ने हिंदू वोटों पर और अधिक पकड़ बनाने के लिए उपदेशों का आयोजन किया है ताकि 'असली' भगवान राम को जनता का सामने लाया जा सके। वहीं, कांग्रेस ने भी अपने 'विचार विभाग' के जरिए रामायण से जुड़े कार्यक्रम की योजना बनाई है।

शशि थरूर देंगे उद्घाटन संबोधन

'रामायण मास' के पहले दिन यानी 17 जुलाई को कांग्रेस नेता शशि थरूर तिरुवनंतपुरम से उद्घाटन संबोधन देंगे। कांग्रेस के विचार विभाग के अध्यक्ष का कहना है कि ये पहली बार है कि कांग्रेस रामायण मास में रामायण से जुड़े कार्यक्रम कर रही है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने जिस राम राज्य का सपना देखा था, उसे पूरा करने की कोशिश की जाएगी और इसे व्यापक रूप से लोगों के सामने लाया जाएगा।
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सीपीएम 'संस्कृत संघ' के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़ेगी

रामायण मास के दौरान होने वाले कार्यक्रमों में सीपीएम 'संस्कृत संघ' के माध्यम से जुड़ेगी। गौरतलब है कि केरल के सभी 14 जिलों में संस्कृत संघ की समितियां हैं और इन समितियों के अधिकतर सदस्य सीपीएम के हैं। एक तरफ तो सीपीएम इन कार्यक्रमों के जरिए कांग्रेस को पछाड़ने में लगी है तो वहीं दूसरी तरफ इसका लक्ष्य भाजपा और आरएसएस के बढ़ते प्रभाव को भी रोकना है। 
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