हरियाणा में सरकार बनाने से चूक गए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा था कि पार्टी ने राज्य में नेतृत्व के मसले पर फैसला लेने में देर कर दी अन्यथा राज्य के चुनाव परिणाम कुछ और हो सकते थे। क्या दिल्ली में भी पार्टी ने वही गलती कर दी है? पार्टी नेता मानते हैं कि नेतृत्व के मसले पर कुछ देरी जरूर हुई है लेकिन दिल्ली में पार्टी का आधार देखते हुए इसे 'मैनेज' कर लिया जाएगा।
हरियाणा में कांग्रेस सरकार बनाने से भले ही चूक गई हो, लेकिन इसने पार्टी कार्यकर्ताओं में जान फूंकने का काम किया है। विधायक रह चुके कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि हरियाणा चुनाव ने साबित कर दिया है कि समाज में भाजपा के खिलाफ बड़ा आक्रोश है। इस आक्रोश को एक जगह केंद्रित कर परिणाम में बदलने की कोशिश की जानी चाहिए।
दलित समाज रविदास मंदिर पर तो जाट समाज आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा से बिदक चुका है। अल्पसंख्यक वर्ग पहले से ही भाजपा से नाराज है। दिल्ली में इन सभी वर्गों को एक साथ लाने और सहेजने की जिम्मेदारी कांग्रेस की है जिसे पूरा करने की कोशिश की जाएगी। पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए तैयार होने की कोशिश कर रही है।