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CEC: धर्मेंद्र प्रधान बोले, रोने वाले बच्चे की तरह बर्ताव कर रहे राहुल, नहीं टूटा कोई नियम

Tue, 18 Feb 2025 05:43 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Dharmendra Pradhan: केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए अपनी सुविधानुसार संविधान को कई बार कुचलीा। कांग्रेस ने बाबा साहब अंबेडकर का उपहास करने और उनका अपमान करने का कोई मौका नहीं छोड़ा
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धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सीईसी कि नियुक्ति पर आलोचना को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह रोने वाले बच्चों की तरह काम कर रहे हैं, जबकि कोई नियम या कानून नहीं तोड़ा गया है। 
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प्रधान ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, कांग्रेस ने अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए अपनी सुविधानुसार संविधान को कई बार कुचलीा। कांग्रेस ने बाबा साहब अंबेडकर का उपहास करने और उनका अपमान करने का कोई मौका नहीं छोड़ा, फिर भी कांग्रेस के युवराज बाबा साहब और हमारे संस्थापक नेताओं के आदर्शों को कायम रखने का दुस्साहस कर रहे हैं। प्रधान ने कहा, राहुल का यह ताजा तमाशा सीईसी की नियुक्ति पर विवाद पैदा करने और दुष्प्रचार का एक और प्रयास है। 

उन्होंने पूछा कि क्या राहुल गांधी भूल गए हैं कि कांग्रेस के शासन के दौरान चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कैसे की जाती थी? दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस सरकार ने चयन तंत्र में सुधार के लिए कुछ क्यों नहीं किया?
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वास्तव में पहली बार कानून के अनुसार हुई सीईसी की नियुक्ति
शिक्षा मंत्री ने आगे कहा, वास्तव में, यह पहली बार है कि सीईसी की नियुक्ति संसद में पारित कानून के माध्यम से की गई है। यह हमारी सरकार है जिसने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए एक संयुक्त प्रणाली बनाई है, जिसमें विपक्ष के नेता भी शामिल हैं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी बिना किसी नियम/कानून के उल्लंघन के रोते बच्चे की तरह बर्ताव कर रही है।

राहुल ने लगाए थे गंभीर आरोप

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नए मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) की नियुक्ति के बाद मंगलवार को आरोप लगाया कि ऐसे समय में यह निर्णय आधी रात को लेना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के लिए गरिमा के प्रतिकूल है, जब चयन समिति की संरचना और प्रक्रिया को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई है और 48 घंटे से भी कम समय में सुनवाई होनी है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सरकार का यह कदम वर्ष 2023 में आए उच्चतम न्यायालय के आदेश की मूल भावना का घोर उल्लंघन है।

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