कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर इसरो का गला घोंटने और उसे कमजोर करने का आरोप लगाया। साथ ही विपक्षी पार्टी ने सरकार पर अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए आक्रामक निजीकरण एजेंडा अपनाने का भी आरोप लगाया। कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में हमारे देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम में इसरो की भविष्य की भूमिका को लेकर खबरें आई हैं।
जयराम रमेश ने X पर साझा पोस्ट में कहा, 'इसने चिंताएं पैदा की हैं, क्योंकि विक्रम साराभाई, सतीश धवन, ब्रह्म प्रकाश, यू.आर. राव, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और कई अन्य प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकीविदों की दूरदर्शिता, समर्पण और नेतृत्व की बदौलत पिछले छह दशकों में इसरो की क्षमताएं और दक्षता बहुत मेहनत से विकसित की गई हैं।' इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन की स्थापना 1969 में हुई थी और साराभाई, जिनकी इसमें अहम भूमिका थी, इसके पहले अध्यक्ष बने थे।
निजीकरण का एजेंडा चलाने का आरोप
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि मोदी सरकार का अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए भी निजीकरण एजेंडा है, ठीक वैसा ही जैसा परमाणु ऊर्जा के मामले में था। रमेश ने आरोप लगाया, 'इसके पीछे की प्रेरणा साफ तौर पर प्रधानमंत्री और पीएमओ से आ रही है। रॉकेट के विकास और निर्माण में इसरो की मौजूदगी को बहुत सीमित किया जा रहा है और इसकी सैटेलाइट से जुड़ी ज़्यादातर संपत्तियों को पूरी तरह से निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी है।'
अंतरिक्ष केंद्र भी निजी कंपनी को सौंपने का दावा
कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि मोदी सरकार तमिलनाडु में बन रहे दूसरे अंतरिक्ष केंद्र को भी एक निजी कंपनी को सौंपने जा रही है, जिसके लिए वह लगभग 1,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। जयराम रमेश ने कहा कि इसरो ने भारत को बहुत गौरवान्वित किया है और प्रधानमंत्री ने खुद कई मौकों पर इसकी कामयाबी का श्रेय लिया है।
रमेश ने दावा किया, 'स्पेस स्टार्टअप निश्चित रूप से प्रोत्साहन और समर्थन के हकदार हैं। लेकिन इसरो का गला क्यों घोंटा जा रहा है और उसे कमजोर क्यों किया जा रहा है? पहले ही, शायद आने वाले हालात को भांपते हुए और पिछले कुछ महीनों में इसरो के 100-120 अहम पेशेवर नौकरी छोड़ चुके हैं।' जी. माधवन नायर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसरो के एक पूर्व चेयरमैन ने भी निजीकरण की नई मुहिम पर गंभीर संदेह जताया है।