तेल कीमतों से 12 लाख करोड़ की बचत
पवन खेड़ा का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में रुपये को 10 प्रतिशत से भी ज्यादा नुकसान हुआ है, जिसका असर आज हम बढ़ी हुई कीमतों पर दिख रहा है। जबकि पिछले 52 महीनों में कच्चे तेल की कीमतें 55 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुकी हैं, लेकिन मुंबई में पेट्रोल की कीमतें 90 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच चुकी हैं, वहीं डीजल 79.72 रुपए पर आ चुका है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने बढ़ी हुई तेल कीमतों से 12 लाख करोड़ की जो बचत की है, उससे आमजनता राहत देने में क्यों देरी हो रही है।
फेल हुई उज्जवला योजना
वहीं कांग्रेस ने उज्जवला योजना पर कहा कि उज्ज्वला योजना पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। इस योजना में मोदी सरकार 1600 रुपये की छूट देती थी, वो भी किश्तों में उपभोक्ता से वापस वसूली जा रही है। पिछले साढ़े चाल सालों में एलपीजी गैस सिलेंडर में 400 रुपए की बढ़ोतरी हो चुकी है। मई 2014 में बिना सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर की कीमत 412 रुपए थी, जो अक्टूबर 2018 में बढ़ कर 831 रुपए पहुंच चुकी है।
सीएनजी-पीएनजी भी हों जीएसटी में
मोदी सरकार को चेतावनी देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि मोदी जी को चुप जनता का गुस्सा बहुत भारी पड़ने वाला है, जो आगामी चुनावों में वोटों के रूप में दिखाई पड़ेगा। खेड़ा का कहना है कि कांग्रेस पार्टी और आम जनता की उम्मीद खत्म हो चुकी है कि सरकार कीमतों को कम करने की दिशा में कुछ करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की मांग है कि पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ सीएनजी और पीएनजी को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाए।