कांग्रेस ने गुरुवार को कहा कि वह 20 महीनों से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर रही थी। हालांकि, केंद्र सरकार ने यह कदम तभी उठाया, जब राज्य का सामाजिक ढांचा गंभीर रूप से नुकसान पहुंच गया। हिंसाग्रस्त राज्य आज राष्ट्रपति शासन लगाया गया। इसके साथ ही राज्य की विधानसभा को निलंबित किया गया।
यह कदम मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के पद से इस्तीफा देने का बाद उठाया गया। उनके इस्तीफे के बाद राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई थी। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, आखिरकार वहीं हुआ, कांग्रेस जिसकी 20 महीने से मांग कर रही थी। मणिपुर में राष्ट्रपति में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है।
'मणिपुर में सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचने दिया गया'
रमेश ने कहा, यह तब हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य में सांविधानिक तंत्र पूरी तरह से टूट चुका है। इसकी वजह से 3 मई 2023 के बाद 300 से ज्यादा हत्याएं और 60 हजार से अधिक पुरुष, महिलाएं और बच्चे बेघर हुए। उन्होंने कहा कि यह कदम (राष्ट्रपति शासन लगाने) उठाने से पहले मणिपुर के सामाजिक ढांचे के बुरी तरह से नुकसान पहुंचने दिया गया, जब तक पूरी तरह नष्ट नहीं हो गया।
सुलह की प्रक्रिया शुरू करने को तैयार नहीं पीएम: रमेश
कांग्रेस नेता ने कहा कि फरवरी 2022 में भाजपा और उसके सहयोगियों को बड़ा बहुमत मिला था, लेकिन उनकी राजनीति के कारण 15 भयावह त्रासदी हुई। उन्होंने कहा, यह इसलिए हुआ क्योंकि गृह मंत्री (अमित शाह) मणिपुर का प्रबंधन करने में विफल रहे, जिसका जिम्मा प्रधानमंत्री ने उन्हें सौंपा था। प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए रमेश ने कहा, विदेश घूमने वाले प्रधानमंत्री मणिपुर का दौरा करने से मना कर रहे हैं और सुलह की प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी तैयार नहीं हैं।
मणिपुर विधानसभा को निलंबित किया गया: केंद्रीय गृह मंत्रालय
गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर बताया कि मणिपुर विधानसभा को निलंबित कर दिया गया है। करीब 21 महीनों की जातीय हिंसा के बाद मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने 9 फरवरी को इस्तीफा दिया। उन्होंने इंफाल में राजभवन में अपना इस्तीफा अजय कुमार भल्ला को सौंपा। इससे कुछ घंटों पहले ही उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।
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