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Caste Census: जाति जनगणना को लेकर खरगे का पीएम मोदी को पत्र, इसमें आरक्षण से 50% की सीमा हटाने समेत कई सुझाव

Tue, 06 May 2025 10:04 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने मल्लिकार्जुन खरगे के पत्र को साझा करते हुए कहा, '2 मई को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने कल रात प्रधानमंत्री को जाति जनगणना पर पीएम मोदी के अचानक और हताशापूर्ण यू-टर्न के बारे में पत्र लिखा। वो भी तब जब पहलगाम में हुए क्रूर आतंकवादी हमलों पर देश की पीड़ा और गुस्सा लगातार जारी है।'
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पीएम मोदी और मल्लिकार्जुन खरगे। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर पत्र लिखा है। पत्र में जाति जनगणना के लिए तेलंगाना मॉडल को अपनाने, आरक्षण के लिए 50 प्रतिशत की सीमा हटाने और निजी शिक्षण संस्थानों में एससी-एसटी-ओबीसी के लिए आरक्षण प्रदान करने वाले अनुच्छेद 15(5) को तुरंत लागू करने का आग्रह किया गया है। पत्र में खरगे ने प्रधानमंत्री से जाति जनगणना के मुद्दे पर जल्द ही सभी राजनीतिक दलों से बातचीत करने का भी आह्वान किया है।

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खरगे ने लिखा कि मैंने 16 अप्रैल 2023 को आपको पत्र लिखकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा जातिगत जनगणना कराने की मांग आपके समक्ष रखी थी। अफसोस की बात है कि मुझे उस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला। दुर्भाग्य से उसके बाद आपके पार्टी के नेताओं और स्वयं आपने कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के नेतृत्व पर इस जायज मांग को उठाने के लिए लगातार हमले किए। आज आप स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि यह मांग गहन सामाजिक न्याय और सामाजिक सशक्तिकरण के हित में है। आपने बिना किसी स्पष्ट विवरण के यह घोषणा की है कि अगली जनगणना (जो वास्तव में 2021 में होनी थी) में जाति को भी एक अलग श्रेणी के रूप में शामिल किया जाएगा। इस संबंध में मेरे तीन सुझाव हैं, जिन पर आप कृपया विचार करें।

उन्होंने लिखा, 'जनगणना से सम्बंधित प्रश्नावली का डिजाइन बहुत महत्वपूर्ण है। जाति संबंधी जानकारी केवल गिनती के लिए नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एकत्र की जानी चाहिए। हाल ही में संपन्न तेलंगाना में जातिगत सर्वेक्षण को इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन और कार्यान्वित किया गया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय को जनगणना में इस्तेमाल किए जानेवाले प्रश्नावली और पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए तेलंगाना मॉडल का उपयोग करना चाहिए। प्रक्रिया के अंत में प्रकाशित होने वाली रिपोर्ट में कुछ भी छिपाया नहीं जाना चाहिए, ताकि प्रत्येक जाति के पूर्ण सामाजिक-आर्थिक आंकडे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हों, जिससे एक जनगणना से दूसरी जनगणना तक उनकी सामाजिक-आर्थिक प्रगति को मापा जा सके और उन्हें संवैधानिक अधिकार दिए जा सकें। 
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आगे खरगे ने लिखा, 'अगस्त 1994 में तमिलनाडु का आरक्षण कानून अधिनियम हमारे संविधान की नवीं सूची में शामिल किया गया था। इसी तरह सभी राज्यों द्वारा पारित आरक्षण संबंधी अधिनियमों को संविधान की नवीं सूची में शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा जाति जनगणना के जो भी नतीजे आएं, यह स्पष्ट है कि अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण पर मनमाने ढंग से लगाई गई 50% की अधिकतम सीमा को संविधान संशोधन के माध्यम से हटाया जाना होगा।'

उन्होंने लिखा, 'अनुच्छेद 15(5) को भारतीय संविधान में 20 जनवरी 2006 से लागू किया गया था। इसके बाद इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। लंबे विचार-विमर्श के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने 29 जनवरी 2014 को इसे बरकरार रखा। यह फैसला 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले आया। यह निजी शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रावधान करता है। उच्च शिक्षा विभाग के लिए अनुदान की मांग पर अपनी 364वीं रिपोर्ट में, जिसे 25 मार्च 2025 को प्रस्तुत किया गया था, शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल पर संसदीय स्थायी समिति ने भी अनुच्छेद 15 (5) को लागू करने के लिए नए कानून बनाने की भी सिफारिश की थी।'
  
उन्होंने लिखा, 'जाति जनगणना जैसे किसी भी प्रक्रिया को, जो पिछड़ों, वंचितों और हाशिये पर खड़े लोगों को उनके अधिकार दिलाने का माध्यम बनता है, किसी भी रूप में विभाजनकारी नहीं माना जाना चाहिए। हमारा महान राष्ट्र और हमारे विशाल हृदय लोग विपरीत परिस्थितियों में हमेशा एकजुट होकर खड़े हुए हैं। हाल ही में पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमलों के बाद हम सबने एकजुटता का परिचय दिया।'

खरगे ने कहा, 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का मानना है कि सामाजिक और आर्थिक न्याय तथा स्थिति और अवसर की समानता सुनिश्चित करने के लिए जाति जनगणना को उपरोक्त सुझाए गए समग्र तरीके से कराना अत्यंत आवश्यक है। यही हमारे संविधान की प्रस्तावना में भी संकल्पित है। 
मुझे भरोसा है कि आप मेरे सुझावों पर विचार करेंगे। दरअसल, मैं आपसे आग्रह करता हूं कि जाति जनगणना के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों के साथ शीघ्र संवाद करें।'

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