काउंटर से वेटिंग टिकट लेने वालों की तरह ही इंटरनेट के जरिए वेटिंग टिकट लेने वाले ट्रेनों में यात्रा कर सकेंगे या नहीं इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अदालत के आदेश के बाद भी रेलवे अभी कुछ कहने की स्थिति में दिखाई नहीं पड़ रहा है। हालांकि छह महीने का वक्त रेलवे को मिला है, जिससे रेलवे कानूनी प्रक्रिया को समझने में लगा हुआ है।
अदालत के काउंटर और इंटरनेट से लिए गए वेटिंग टिकट के भेद को खत्म करने वाले निर्णय के बाद भी यह तय नहीं हो पा रहा है कि ई-टिकट वाले ट्रेनों में यात्रा कर सकेंगे या नहीं। हालांकि अभी पूर्ववत ही स्वत: ई-वेटिंग टिकट निरस्त हो रहा है और टिकट का पैसा बैंक खाते में जा रहा है। रेलवे सूत्रों के अनुसार रेलवे एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया समझने में लगा है। दरअसल रेलवे के पास अभी छह महीने का वक्त है। इस बीच रेलवे तकनीकी पक्ष लेकर एक बार फिर अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने वर्ष 2014 के हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली रेल मंत्रालय की याचिका खारिज कर दी है। सुनवाई की दो तारीख अदालत ने दी लेकिन रेलवे की तरफ से कोई वकील अदालत के समक्ष पेश नहीं हुआ। लिहाजा पीठ ने याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने रेल मंत्रालय को काउंटर टिकट और ई-टिकट लेने वालों के बीच भेद को दूर करने के लिए छह महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है।