भारत में दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों को दर्ज करने वाली संस्था ‘एनसीआरबी’ के आंकड़ों के अनुसार देश में हर साल करीब 2000 लोगों की मौत बिजली गिरने से होती है, जो कि प्राकृतिक आपादाओं से होने वाली मौतों में सबसे अधिक है।
भारत में सबसे अधिक बिजली की घटनाएं इसलिए भी होती हैं क्योंकि भूमध्य रेखा और हिन्द महासागर के निकट होने से गर्मी और आर्द्रता अधिक होती है, जो कि आंधी-तूफान के बनने में सहायक होते हैं। इस बारे में कुमार मार्गश्याम कहते हैं, 'तापमान, आर्द्रता और अन्य स्थानीय मौसम में आए तीव्र बदलाव के कारण ही आंधी-तूफान अधिक आते हैं, जिस कारण बिजली गिरने की भी घटनाएं बढ़ती हैं।'
भारत में जून में सबसे अधिक बिजली गिरने की घटनाएं इसलिए भी होती हैं क्योंकि मानसून की दस्तक के साथ ही तापमान की अधिकता होने से आंधी-तूफान अधिक बनते हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग में प्रादेशिक मौसम पूर्वानुमान केन्द्र के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. कुलदीप श्रीवास्तव कहते हैं कि पूर्वी यूपी और बिहार में प्री मानसून में सबसे अधिक थंडरस्टार्म और बिजली की घटनाएं होती हैं।
क्या होती है बिजली
आकाश में बादलों के बीच जब टक्कर होती है, यानि घर्षण होने से अचानक इलेक्ट्रोस्टैटिक चार्ज निकलती है, ये तेजी से आसमान से जमीन की तरफ आती है। इस दौरान हमें तेज कड़क आवाज सुनाई देती है और बिजली की स्पार्किंग की तरह प्रकाश दिखाई देता है।
सरकार ने आकाशीय बिजली की सूचना देने के लिए ‘दामिनी’ के नाम से एप भी जारी किया है, जिस पर आसपास घटित होने वाली ऐसी घटनाओं के संबंध में मौसम विभाग द्वारा अलर्ट जारी किया जाता है। लेकिन गांवों तक इसकी जानकारी पहुंचना बड़ी चुनौती है।
इन बातों का रखें ध्यान
- तुरंत पानी, बिजली के तारों, खंभों, हरे पेड़ों और मोबाइल टॉवर आदि से दूर हट जाएं।
- घर से बाहर हैं तो हाथों को कानों पर रख, दोनों एड़ियों को जोड़कर जमीन पर बैठ जाएं।
- अगर एक से ज्यादा लोग हैं तो एक दूसरे से दूरी बनाकर रखें।
- छतरी या सरिया जैसी कोई चीज है तो उसे दूर रखें, ऐसी चीजों पर बिजली गिरने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है।
- पुआल वगैरह के ढेर से दूर रहें, उसमें आग लग सकती है।