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Maha Kumbh: किसी ने अपनों को खोया तो कोई अब भी तलाश में, अमर उजाला के रिपोर्टरों की जुबानी हादसे की कहानी

Thu, 30 Jan 2025 09:31 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज

सार

अमर उजाला के संवाददाताओं ने खबर बताने और दिखाने की अपनी जिम्मेदारी निभाई। साछ ही इस बात की भी तस्दीक की कि कोई अफवाहें न फैलें। मिस इन्फॉर्मेशन न फैले और कोई गलत बयानी न हो। 
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अमर उजाला के रिपोर्टर ने बताया पल पल का हाल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मौनी अमावस्या पर संगम नोज पर हुए हादसे के बाद राहत कार्य जारी हैं। घायलों का समुचित इलाज किया जा रहा है, वहीं मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का एलान किया गया है। इस हादसे की जांच के लिए न्यायिक समिति भी गठित कर दी गई है। तमाम राहत कार्यों के बीच अमर उजाला के रिपोर्टस को मौके पर मौजूद लोगों ने भयावहता की जो कहानियां सुनाई हैं वो भावुक कर देने वाली हैं। जब यह हादसा हुआ तो अमर उजाला के रिपोर्टर संगम नोज से लेकर अस्पताल तक पर मौजूद थे। जब सोशल मीडिया में तमाम फर्जी आंकडे और तमाम फर्जी बातें चल रही थीं। तब अमर उजाला के रिपोर्टर्स ने आप तक सच को पहुंचाया।

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कई ने अपनों को खोया तो कोई अब भी अपनों की तलाश में
देश-विदेश के करोड़ों लोग संगम में डुबकी लगाने के लिए पहुंच रहे हैं। मौनी अमावस्या पर होने वाले स्नान का बड़ा महत्व है। माना जाता है कि ये स्नान, अमृत स्नान के समान है। इसी वजह से करोड़ों लोग मौनी अमावस्या से पहले ही संगम पहुंच गए थे। शासन और प्रशासन ने भी व्यापक इंतजाम किए थे, लेकिन ये पूरे इंतजाम इतनी बड़ी भीड़ के सामने ढह गए। भीड़ का रेला जब चला तो सामने जो भी आया उसे रौंदता चला गया। इस हादसे में घायलों और हताहतों के अलावा कई ऐसे भी हैं जो अपनों से बिछड़ गए। इस हादसे ने कई लोगों को जिंदगी भर याद रहने वाली चोट दे दी।  

 सुप्रिया ने कवरेज के साथ पेश की इंसानियत की मिसाल
दरअसल, मंगवार देर रात जब संगम नोज के पास हादसा हुआ तो अमर उजाला की पत्रकार सुप्रिया शर्मा वहां कवरेज के लिए मौजूद थीं। अमृत स्नान की वजह से वह अपनी टीम के साथ महाकुंभ नगर में मौजूद थी और अखाड़ों की कवरेज के लिए तैयारी कर रही थीं। तभी उन्हें हादसे की खबर लगी। वह तुरंत ही टीम के साथ मोके पर पहुंची। उन्होंने देखा कि किनारे लेटे हुए लोग भीड़ के पैरों तले दब गए हैं। जो लोग संगम नोज पर मौजूद थे, भीड़ के धक्के के कारण वो पानी में गिर गए हैं। विचलित करने वाले मंजर के बीच उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया और लोगों की मदद के लिए हरसंभव प्रयास करना शुरू किया।
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एक ही रास्ते से आ और जा रहे थे लोग
करीब 1 बजे का वक्त था जब हनुमान मंदिर की तरफ अमर उजाला के संवाददाता नीतीश पांडे मौजूद थे। उन्होंने एक के बाद एक तेजी से जाती एंबुलेंस देखीं तो कुछ गलत होने की आशंका हुई। वो तुरंत सेंट्रल हॉस्पिटल पहुंचे। एंबुलेंस में जो लोग आ रहे थे, उनसे बातें कीं। बिछड़ों को परिवार से मिलाने में मदद की। नीतीश बताते हैं कि एक ही रास्ते से लोग स्नान के लिए जा रहे थे और उसी रास्ते से लोग वापस भी आ रहे थे। इसलिए उस रास्ते पर भीड़ बेकाबू हो गई, और हादसा हो गया।

अमर उजाला के रिपोर्टर भूपेंद्र सिंह आज सुबह से ही फील्ड मैं मौजूद थे। उन्होंने कई ऐसे लोगों से बात की जो अपनों से बिछड़ गए। वो बताते हैं कि जो लोग जत्थों में आ रहे हैं, वो अपने साथ ऊंचा झंडा भी ला रहे हैं। ये किसी खास रंग का झंडा होता है. इसको देखकर खोए या बिछड़े साथी उस जगह तक पहुंच जाते हैं। यही नहीं लोग दुपट्टे या मफलर को रस्सी की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इसको तीन से चार लोग पकड़कर चल रहे हैं ताकि खो न जाएं। भूपेंद्र ने बताया कि ऐसी भीड़ है, ऐसा दृश्य है मानो इंसानों का समुद्र हो। 

अमर उजाला के संवाददाताओं ने खबर बताने और दिखाने की अपनी जिम्मेदारी भी निभाई, और इस बात की भी तस्दीक की कि कोई अफवाहें न फैलें। मिस इन्फॉर्मेशन न फैले और कोई गलत बयानी न हो। 

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