आरबीआई ने ऑनलाइन धोखाधड़ी में ग्राहकों की देयता सीमित करने के निर्देश जारी किए हैं। 50,000 रुपये तक के नुकसान में ग्राहक को 85% तक मुआवजा मिलेगा, अधिकतम 25,000 रुपये, बशर्ते शिकायत 5 दिन में और साइबर क्राइम पोर्टल/1930 पर दर्ज हो। नियम 1 जुलाई से लागू होंगे और सभी वाणिज्यिक, स्मॉल फाइनेंस व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों पर लागू होंगे।
ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हुए लोगों को मुआवजा दिया जाएगा। यदि धोखाधड़ी में नुकसान 50,000 रुपये तक होता है, तो ग्राहक को 85 फीसदी तक मुआवजा मिलेगा। यह अधिकतम 25,000 रुपये होगा और तभी मिलेगा, जब शिकायत 5 दिन में की गई हो। साथ ही, साइबर क्राइम पोर्टल या 1930 हेल्पलाइन पर धोखाधड़ी की रिपोर्ट की गई हो। ऑनलाइन लेनदेन में डेबिट व क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, एटीएम शामिल हैं। ग्राहकों को यह सुविधा सिर्फ एक बार मिलेगी।
शिकायत पर बैंक को उठाने होंगे कदम
शिकायत पर ग्राहक को तुरंत शिकायत संख्या और समय भेजा जाएगा। बैंक को आगे के अनधिकृत लेनदेन रोकने के कदम उठाने होंगे। धोखाधड़ी में ग्राहक की गलती साबित करने की जिम्मेदारी बैंक पर होगी। बैंक या तीसरे पक्ष की लापरवाही और ग्राहक के 5 दिन में रिपोर्ट करने पर तो ग्राहक की जिम्मेदारी नहीं होगी।
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500 से अधिक के लेनदेन पर एसएमएस अलर्ट
बैंक को इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहक सुरक्षा के लिए नीति बनानी होगी। इसमें लेनदेन अलर्ट, ग्राहकों के अधिकार और दायित्व शिकायत समाधान की समय सीमा, ग्राहक जागरूकता तंत्र जैसी व्यवस्था करनी होगी। सुरक्षित डिजिटल भुगतान प्रणाली, मजबूत धोखाधड़ी पहचान तंत्र, जोखिम मूल्यांकन प्रणाली जैसे उपाय करने होंगे। 500 रुपये से अधिक के सभी इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन पर तत्काल एसएमएस अलर्ट अनिवार्य होगा।
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