दूरसंचार कंपनियां अब न तो आधार नंबर की जानकारी अपने पास रख पाएंगी और ना ही उन्हें कहीं दर्शा सकेंगी। टेलीकॉम विभाग ने उन्हें नया सिम कार्ड देते या पुराने की पुष्टि करने के लिए आधार वर्चुअल आईडी विकल्प का इस्तेमाल करने को कहा है। ऐसे ग्राहक को आधार नंबर देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सरकार ने दूरसंचार सेवा प्रदाताओं से कहा है कि वे अपनी प्रणालियों व नेटवर्क में उचित बदलाव करें। ताकि आधार संख्या की जगह वर्चुअल आईडी का इस्तेमाल संभव हो। इसके साथ ही मोबाइल ग्राहकों के लिए सीमित केवाईसी प्रणाली की ओर बढ़ा जा सके। यह पहल एक जुलाई से आधार संख्या की जगह वर्चुअल आईडी प्रणाली के कार्यान्वयन को देखते हुए की गई है। दूरसंचार विभाग ने इस बारे में अधिसूचना जारी की है। इसके अनुसार यूआईडीएआई द्वारा वर्चुअल आईडी के कार्यान्वयन के लिए प्रस्तावित बदलावों को ध्यान में रखते हुए सभी लाइसेंस धारक दूरसंचार कंपनियों को अपनी प्रणाली में उचित बदलाव करा होगा।
वर्चुअल आईडी प्रणाली 16 अंकों की एक विशेष लेकिन अस्थायी संख्या है। इसके आधार की स्थान पर बनाया जा सकेगा। आधार डेटा की सुरक्षा व गोपनीयता को और सुरक्षित करने के लिए इस फीचर को अगले महीने से लागू किया जा रहा है। दूरसंचार विभाग ने सर्कुलर ने में जिक्र किया है कि आधार नंबर की निजता और सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए यूआईडीएआई ने आधार ईकोसिस्टम में कुछ बदलाव का प्रस्ताव दिया है।
इसके अलावा विभाग ने दूरसंचार कंपनियों से ये कहा है कि वह आधार व वर्चुअल आईडी की विस्तार अपने पास नहीं रखेंगी। जब किसी ग्राहक की पुष्टी हो रही हो तब भी वुर्चअल आईडी पर आधार नंबर नहीं दिखाई देना चाहिए। यह वैसे ही दिखना चाहिए जैसे पासवर्ड इत्यादि दिखता है। विभाग की तरफ से हिदायत जारी की गई है कि अगर दिशा-निर्देशों का लन करने में किसी तरह की गड़बड़ी पाई जाती है तो कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि यूआईडीएआई ने इसी साल अप्रैल में वुर्चअल आईडी की सुविधा को शुरू किया था।