कम्यूनिस्ट राजनीति को आमतौर पर पूंजीवाद विरोधी और प्रचार प्रसार से दूर रहने वाली माना जाता है, यही कारण है कि चुनावों के दौरान जहां अन्य पार्टियां प्रचार प्रसार पर जमकर पैसा खर्च करती हैं वहीं वामदल इससे दूर ही रहना पसंद करते हैं।
कम्यूनिस्टों के बारे में माना जाता है कि भगवान को लेकर भी उनकी खास आस्था नहीं रहती लेकिन केरल की नई पी विजयन सरकार इन तमाम स्थापित मतों को तोड़ती नजर आ रही है। बुधवार को जिस समय पोलित ब्यूरो के सदस्य पिनारयी विजयन मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे उस समय उनके बड़े-बड़े विज्ञापन से देश के बड़े अंग्रेजी अखबारों के पहले पन्ने सने हुए थे।
वाम राजनीति के इस बदलते रंग रूप पर हर कोई हैरान था उसके समर्थक भी और कर्ताधर्ता भी। कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी तक के पास भी इस सवाल का कोई जवाब नहीं था कि प्रचार-प्रसार से दूर रहने की वामदलों की सदियों पुरानी परंपरा केरल में कैसे एक झटके में ही टूट गई।
सवाल सिर्फ अखबारों में विज्ञापन भर का ही नहीं था उस मजमून का भी था जो विज्ञापन में छपा था। खुद को नास्तिक कहने वाले और भगवान की मान्यताओं से दूरी रखने वाले कम्यूनिस्टों की केरल सरकार ने जो विज्ञापन दिया उसमें केरल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री पी विजयन की ओर से टैगलाइन दी गई है, ‘केरल को भगवान का खुद का देश बनाने के प्रति वचनबद्ध’।