हरी सब्जियों और आलू-प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच ये खबर आम आदमी के लिए राहत लेकर आई है। दिवाली और छठ के त्योहार खत्म होने के साथ ही बाजार में सोयाबीन की आवक में इजाफा होना शुरू हो गया है। इसका सीधा असर तेल के भाव पर देखने को मिल रहा है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में खाद्य तेलों के दामों में कमी देखने को मिल सकती है।
खाद्य तेल के कारोबार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि त्योहारी सीजन खत्म होने के बाद से ही ऊंचे दामों पर तेल में बिक्री भी घट रही है। ऐसे में प्लाटो की सोयाबीन में लेवाली कमजोर देखने को मिली है। इसके असर से सोयाबीन के दामों में गिरावट दर्ज की गई है। प्लांट की ओर से सोयाबीन खरीदी भाव करीब 25-50 रुपये तक कमजोर बोले जा रहे हैं।
शादियों के सीजन में भी उपभोक्ताओं की मांग बढ़ने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। इसलिए तेल के भाव में भी गिरावट होने की उम्मीद है। इन दिनों बाजार में सोयाबीन तेल घटकर 1320-1325 रुपये प्रति दस किलो रह गया है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूती बनी हुई है। इसके चलते पाम तेल में तेजी जारी रहेगी। पाम तेल में तेजी को ध्यान में रखते हुए सोयाबीन तेल भी ज्यादा कम की संभावना नहीं है।
इसलिए आ रही है गिरावट
मलेशिया एक्सचेंज में आ रही गिरावट के बीच देश के थोक तेल-तिलहन बाजार में सभी तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। इसके चलते सरसों, मूंगफली एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पाम तेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल तथा बिनौला तेल के दाम गिरे हुए दिख रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि सहकारी संस्था नाफेड ने करीब 53 हजार टन सरसों की बिकवाली की जिसकी वजह से सरसों तेल-तिलहन में गिरावट है।
वहीं, मूंगफली की नई फसल की आवक बढ़ने से मूंगफली तेल-तिलहन कीमतों में भी गिरावट है। कारोबारियों का कहना है कि विदेशों में कमजोर मांग की वजह से ऊंचे दाम वाले देशी सोयाबीन डीओसी की मांग प्रभावित हुई है। दूसरी ओर इस स्थिति को देखते हुए, जो स्टॉकिस्ट पहले स्टॉक जमा कर रहे थे, वे अब पीछे हटने लगे हैं। इससे सोयाबीन तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट आई है। वहीं मलेशिया एक्सचेंज में आई गिरावट के कारण सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतें कमजोर हुई हैं। मूंगफली जैसे तेल की गिरावट का असर बिनौला पर भी देखने को मिला जिसमें नरमी आई है।