सदी के मध्य तक अत्यधिक गर्मी और वायु प्रदूषण के कारण हृदय संबंधी मौतों में 162 फीसदी की वृद्धि होगी। असामान्य रूप से उच्च तापमान और वन्य आग से उत्पन्न वायु प्रदूषण के संयुक्त प्रभाव से दिल का दौरा पड़ने का खतरा दोगुना हो सकता है।
परिस्थिति नहीं बदली तो मौतों का बढ़ेगी दर
अगर परिस्थितियां नहीं बदलीं तो सदी के अंत तक वायु प्रदूषण और अत्यधिक तापमान से जुड़ी सालाना मृत्यु दर के तीन करोड़ तक पहुंचने के आसार हैं। यह जानकारी नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित एक शोध अध्ययन में सामने आई है। मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर केमिस्ट्री के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में पाया गया है कि जब तापमान बढ़ता है तो वायु प्रदूषण का स्तर भी बढ़ता है। इस बात की पुष्टि जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल की आकलन रिपोर्ट भी करती है।
एक नजर रिपोर्ट पर
यह रिपोर्ट सैकड़ों वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों द्वारा लिखित और समीक्षित जलवायु परिवर्तन की स्थिति का गहन मूल्यांकन है। उच्च तापमान के कारण बार-बार सूखा पड़ता है और जंगल में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं जिससे पार्टिकुलेट मैटर पीएम 10 और पीएम 2.5 बढ़ जाते हैं। प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों के संपर्क में आने से स्ट्रोक, हृदय रोग, फेफड़ों का कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और निमोनिया सहित श्वसन संक्रमण जैसी बीमारियां होती हैं।
ट्रोपोस्फेरिक ओजोन एक घातक प्रदूषक
ग्राउंड लेवल या ट्रोपोस्फेरिक ओजोन एक घातक प्रदूषक है जो तब बनता है जब वाहनों, औद्योगिक सुविधाओं, अपशिष्ट, पराली जलाने और अन्य स्रोतों से मीथेन और नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन सहित कार्बनिक यौगिक सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने से रासायनिक रूप से प्रतिक्रिया करते हैं। गर्म तापमान इन प्रतिक्रियाओं को तेज करता है जिससे ओजोन का उत्पादन बढ़ता है जो एक हानिकारक धुंध के रूप में प्रकट होता है। नतीजतन गर्म, शुष्क, कम हवा वाले महीनों के दौरान शहरों में ग्राउंड लेवल ओजोन खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। यह स्थिति सर्दियों के अलावा गर्मी के मौसम में भी निर्मित होती है।
गर्मी वायु प्रदूषण से ज्यादा खतरनाक होगी
सदी के अंत तक दुनिया की आबादी के पांचवें हिस्से के लिए तापमान से संबंधित खतरे वायु प्रदूषण से जुड़े खतरों से अधिक होने के आसार हैं। हालांकि वायु प्रदूषण अपने आप में जीवन और आजीविका को जोखिम में डाल रहा है, लेकिन जब इसे अत्यधिक गर्मी के साथ जोड़ दिया जाता है तो परिणाम और भी घातक हो जाते हैं। गर्मी की लहरों के दौरान पैदा होने वाले उच्च तापमान व स्थिर हवा के संयोजन से लोगों को गंभीर स्वास्थ्य प्रभावों का सामना करना पड़ता है और शहरी बुनियादी ढांचे के क्षरण की आशंका अधिक होती है।
भविष्य की मृत्यु दर में भारी क्षेत्रीय अंतर
वायु प्रदूषण के कारण साल 2000 में सालाना मृत्यु दर लगभग 41 लाख थी जो सदी के अंत तक पांच गुना बढ़कर 1.95 करोड़ हो जाएगी। इस अध्ययन में भविष्य की मृत्यु दर में भारी क्षेत्रीय अंतर दिखा है। मृत्यु दर में दक्षिण और पूर्वी एशिया में सबसे ज्यादा वृद्धि होने के आसार हैं।