पीयूष कर्नल शर्मा से तीन साल बड़े हैं। उन्होंने कहा कि कर्नल शर्मा ने कुछ तस्वीरें भेजी थीं और अब परिवार के पास यही उनकी आखिरी यादें हैं। पीयूष ने कहा, अगर मैं यह जानता कि यह उससे हो रही मेरी आखिरी बातचीत थी तो मैं कभी उस बातचीत को खत्म नहीं करता।
कर्नल के लिए सेना और सेना ही सबकुछ थी
कर्नल शर्मा के दोस्त विजय कुमार ने कहा, मैंने उन्हें कोई अन्य अर्धसैनिक बल चुनने की सलाह दी थी लेकिन वह कहता था कि तुम नहीं समझोगे। उसके लिए सिर्फ सेना और सेना ही सबकुछ थी, उसका जवाब हर बार सेना ही होता। कुमार अभी सीआईएसएफ में डिप्टी कमांडेंट हैं। उन्होंने कहा, उसके तौर-तरीके हमेशा शानदार थे और जब वह बुलंदशहर में रहता था तो मैंने कभी किसी को उस पर चिल्लाते या उसकी शिकायत करते नहीं देखा।
स्पेशल फोर्सेज शामिल होने का था दुख
कक्षा छह में पढ़ने वाली कर्नल शर्मा की बेटी तमन्ना को पकड़े पीयूष ने कहा कि वह नहीं समझ सकती कि रातों रात कैसे सबकुछ बदल जाता है। उन्होंने कहा, लेकिन वह एक बहादुर पिता की बहादुर बेटी है और वह ठीक हो जाएगी। जवानों के लिए लगाव और उनकी समस्याओं के हल करने के उनके स्वाभाव को याद करते हुए पीयूष ने कहा, आशू को सिर्फ एक बात का दुख था कि वह स्पेशल फोर्सेज में शामिल नहीं हो सका।