देशभर के सौ साल से पुराने विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थान अब देश की विशेष धरोहरों में भी शामिल होंगे। इन्हें पर्यटन से भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा छात्रों को अपने विश्वविद्यालय या संस्थान का इतिहास पढ़ने के साथ शोध करने का मौका मिलेगा।
इतना ही नहीं सरकार इन धरोहरों को सहेजने के लिए बजट मुहैया करवाएगी ताकि ऐसे संस्थानों के कैंपस जो इतिहास के पन्नों में अपनी विरासत संजोए हैं, अब उन्हें पर्यटकों से भी रूबरू करवाया जा सकेगा। फिलहाल देशभर के शिक्षण संस्थानों से आवेदन मिलने के बाद पहले चरण में 19 विवि व कॉलेज चयनित हुए हैं। इन 19 शिक्षण संस्थानों को बजट उपलब्ध करा दिया गया है।
इसमें आर्ट गैलरी, म्यूजियम, ऐतिहासिक पुस्तकों को डिजिटल लाईब्रेरी में तब्दील करने आदि पर काम होगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय देश की ऐतिहासिक उच्च शिक्षा की विरासत को दुनिया के समक्ष लाना चाहता है, ताकि दुनिया भारतीय पारंपरिक शिक्षा पद्धति को जान सके।
भारतीय विश्वविद्यालय बेशक दुनिया के सौ सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों में शामिल नहीं हैं लेकिन शिक्षा की ऐतिहासिक विरासत को सहेजने के साथ-साथ दुनिया को दो भारतीय शिक्षाविदों गणितज्ञ श्रीनिवासन रामानुजम और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट के बारे में भी बताया जाएगा। पहले चरण में सौ वर्ष पुराने 60 शिक्षण संस्थानों ने प्रस्ताव भेजा था जिसमें 19 का चयन किया गया था। दूसरे चरण में 160 संस्थानों ने नया आवेदन किया है, जिनपर यूजीसी की टीम कार्य कर रही है।
चयनित किए गए कुछ शिक्षण संस्थानों को कितनी मिली ग्रांट
अागरा कालेज
उत्तर प्रदेश : मेरठ कालेज : 1892 पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने यही से शिक्षा हासिल की थी। मेरठ कालेज को यूजीसी ने 1.34 करोड़ रुपये की ग्रांट दी थी, जिसके तहत आर्ट गैलरी, जियोलोजिकल म्यूजियम समेत कई ऐतिहासिक विरासतों को संजोया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश: आगरा कॉलेज 1823 : पंडित मोती लाल नेहरू और सर छोटू राम इसके एल्युमिनाई रहे हैं। बजट में 25 लाख रुपये जारी हो चुका है।
हिमाचल प्रदेश : सेंट बीट्स कालेज शिमला को 1.15 करोड़ रुपये का बजट मिला है। कालेज को विशेष हेरिटेज पर आधारित शार्ट टर्म सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स करवाना है। इसके अलावा हेरिटेज साइट पर सर्व और पढ़ाई भी करवानी होगी।
पंजाब : खालसा कालेज अमृतसर को दस करोड़ की ग्रांट दी गयी है, जिसके तहत पांडुलिपि साइट को सहेजना, पुराने दस्तावेजों को डिजिटाइजेशन करना
शामिल है। कन्या महाविद्यालय जालंधर को अस्सी करोड़ रुपये दिए गए हैं। ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजना शामिल है।
हरियाणा : डीएवी कालेज अंबाला सिटी को 35 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसके लाइब्रेरी में दुर्लभ किताबों व वाद्य यंत्रों के अलावा ऐतिहासिक विरासत को
सहेजना, हेरिटेज साइट का सर्वे करना शामिल है।
जम्मू कश्मीर: 1905 गर्वनमेंट गांधी मेमोरियल साइंस कालेज जम्मू को 55 करोड़ रुपये की ग्रांट दी गयी है, जिसमें हेरिटेज गैलरी का निर्माण, डिजिटल लाइबेरी, जियोलाजी पर आधारित लाइब्रेरी बनाने से लेकर जम्मू कश्मीर की डोगरा और कश्मीरी संस्कृति, विरासत समेत विरासतों को सहेजना शामिल है।