आधार की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर तेजी से सुनवाई करने की गुहार सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दी है। हालांकि शीर्ष अदालत ने कहा कि निजी एजेंसियों के जरिए डाटा एकत्रित करवाने का आइडिया अच्छा नहीं दिखता।
चीफ जस्टिस जेएस खेहड़ ने यह टिप्पणी तब की जब वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने ‘आधार’ के जरिए ली जाने वाली निजी जानकारियों को निजता का उल्लंघन बताते हुए सुनवाई में तेजी लाने की गुहार की। दीवान ने कहा कि इसके कई अहम पहलू हैं, जिस पर तत्काल सुनवाई की दरकार है। साथ ही उन्होंने कहा कि निजी एजेंसियों के द्वारा बायोमेट्रिक डाटा जुटाए जा रहे हैं, लिहाजा यह लोगों की निजता के अधिकार से भी जुड़ा मामला है।
इस पर पीठ ने सुनवाई में तेजी लाने की गुहार को ठुकराते हुए कहा कि कई अंतरिम आदेश जारी किए जा चुके हैं। लिहाजा सामान्य प्रक्रिया के तहत ही याचिकाओं पर सुनवाई होगी। पीठ ने कहा कि हम जल्द सुनवाई नहीं कर सकते, क्योंकि हमारे पास सीमित संसाधन हैं।