पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक करेंसी चेस्ट के प्रबंधक ने कहा कि उनके यहां कुल नकदी रखने की सीमा 50 करोड़ रुपये है, लेकिन इस समय उनके यहां 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की नकदी जमा है। इस बारे में जब रिजर्व बैंक से बात की गई, तो केंद्रीय बैंक से करेंसी किसी और जगह भेजने का आश्वासन दिया गया। लेकिन असल दिक्कत तो सिक्कों की है। उनके यहां इस समय 90 लाख रुपये से भी ज्यादा के सिक्के हैं।
सिक्कों की गिनती आसान नहीं
पंजाब नेशनल बैंक के एक प्रबंधक का कहना है कि उनके यहां पहले लेन-देन के चार काउंटर थे। लेकिन कर्मचारियों की कमी की वजह से अब दो ही कैश काउंटर चल रहे हैं। ऐसे में यदि कोई ग्राहक एक थैली सिक्का लेकर आ जाता है तो एक-एक सिक्का हाथ से गिनना पड़ता है, जबकि नोट की गिनती तो मशीन से हो जाती है। सिक्का गिनकर लेने में देरी होती है, तो लाइन में पीछे के ग्राहक हल्ला मचाने लगते हैं।
नोट तो खराब हो जाते हैं पर सिक्के नहीं
अधिकारी का कहना है कि करेंसी नोट तो एक हाथ से दूसरे हाथ में गुजरने के दौरान खराब हो जाते हैं या कट-फट जाते हैं, लेकिन सिक्के में कुछ नहीं होता। पहले से जो सिक्के हैं, वो तो चल ही रहे हैं। साथ ही सरकार और भी सिक्के डालती है। उसकी भी आपूर्ति आती रहती है, जबकि इसे लेने वाला कोई नहीं है।