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Coffee Board: दुनिया को पसंद आ रहा भारतीय कॉफी का स्वाद,120 देशों तक पहुंच रही; 5 साल में इतना बढ़ा निर्यात

सार

विदेशों में भी भारतीय कॉफी की डिमांड काफी ज्यादा बढ़ गई है। इसे जापान, कोरिया, यूएई और मध्य पूर्व में खासा पसंद किया जा रहा है। बीते पांच वर्षों में इन देशों में कॉफी की मांग तेजी से बढ़ी है।
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भारतीय कॉफी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत अभी तक दुनिया भर में सबसे बेहतर चाय के मामले में प्रसिद्ध था। लेकिन अब एक ओर बड़ी उपलब्धि भारत के पाले में आई है। वह है भारतीय कॉफी। स्वदेश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भारतीय कॉफी की डिमांड काफी ज्यादा बढ़ गई है। इसे जापान, कोरिया, यूएई और मध्य पूर्व में खासा पसंद किया जा रहा है। बीते पांच वर्षों में इन देशों में कॉफी की मांग तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2023-24 में 1286 मिलियन डॉलर का निर्यात हुआ था। जबकि वर्ष 2024-25 के दौरान 1803 मिलियन डॉलर हो गया है। सालाना तौर पर यह बढ़ोत्तरी 40.20 प्रतिशत से अधिक है।  पिछले पांच वर्षों में काफी से जुड़े उत्पाद का निर्यात 38 प्रतिशत बढ़ा है।
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कॉफी बोर्ड के सीईओ एवं सचिव कूर्मा राव एम का कहना है कि भारत की उच्च गुणवत्ता की कॉफी को वैश्विक स्तर पर काफी बेहद पसंद किया जा रहा है। इनमें सबसे ज़्यादा डिमांड मानसून मालाबार अरेबिका, मैसूर नगेट्स एक्स्ट्रा बोल्ड और रोबस्ट रॉयल जैसी ब्रांड वाली कॉफी की आ रही है। इसके अलावा भी कॉफी के कई ब्रांड काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। कॉफी में कई आवश्यक पोषक तत्व होते हैं जो समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं, जिस कारण से कॉफ़ी का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 

उन्होंने बताया कि, भारत अभी 120 देशों को कॉफी का निर्यात कर रहा है। बीते वर्ष कॉफी के निर्यात में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई। चालू वर्ष में अप्रैल और मई में भी निर्यात में 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वैश्विक स्तर पर कॉफी का निर्माण तेजी से बढ़े, इसलिए हम निर्यातकों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। यही नहीं कॉफ़ी उत्पादन करने वाले राज्यों में कॉफी का उत्पादन कैसे तेजी से बढ़े, इसके लिए हमें किसानों के साथ मिलकर मिलकर काम कर रहे हैं। इसलिए हम काफी के साथ सह-फसल खेती को प्रोत्साहन भी दे रहे है।
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इस वर्ष भी है अच्छे उत्पादन की उम्मीद
कॉफी बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि, इस साल फूलों का खिलना हाल के समय में सबसे आदर्श रहा, क्योंकि फूल खिलने का समय बिल्कुल सही था और साथ ही पर्याप्त बारिश भी हुई। 2021 और 2024 के बीच निर्यात $700 मिलियन से बढ़कर $2 बिलियन हो गया है। हालांकि अब नज़र मानसून पर है कि वह कैसा रहेगा। यदि बारिश अच्छी तरह से होती है तो कॉफ़ी उत्पादक अच्छी पैदावार, बेहतर बीन गुणवत्ता और स्थिर कीमतों की उम्मीद कर सकते हैं।

अधिकारियों का कहना है कि, कॉफ़ी के फसल चक्र के शुरुआती चरण, खासकर फूल खिलना और फल लगना, उपज और गुणवत्ता दोनों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होते हैं। इस साल अब तक सब कुछ सही चल रहा है। कॉफी की खेती में, फूल खिलने का चरण आमतौर पर फरवरी और मार्च में होता है। इस दौरान, समय पर और संतुलित बारिश - जिसे ब्लॉसम और बैकिंग शावर कहा जाता है - महत्वपूर्ण होती है क्योंकि यह फूलों को खिलने में मदद करती है और फलों के विकास में सहायक होती है।
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कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम
इधर, कॉफी निर्यातकों का कहना है कि, फ़िलहाल कॉफी की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। दाम पहले ही तेज है। एक और उछाल की उम्मीद करना अवास्तविक है। लेकिन अगर वे मौजूदा स्तरों पर भी स्थिर रहती हैं, तो यह एक अच्छा रिटर्न है। अगर कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ती हैं, तो इससे खपत कम हो सकती है - खासकर खुदरा स्तर पर, जहां कीमतें पहले ही चुकी हैं। बहुत ज्यादा बढ़ोतरी उपभोक्ताओं को कॉफी से दूर कर देगी।
 
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