जिनेवा में आयोजित कोडेक्स एलीमेंटेरियस कमीशन के 49वें सत्र में भारत की अगुवाई में तैयार सात महत्वपूर्ण खाद्य मानकों को वैश्विक मंजूरी मिली। पहली बार काजू के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक विकसित करने की प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा सूखे धनिया, ताजे करी पत्ते, वनीला और बड़ी इलायची से जुड़े मानकों को भी स्वीकृति मिली।
भारत ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित कोडेक्स एलीमेंटेरियस कमीशन (सीएसी) के 49वें सत्र में भारत की अगुवाई में तैयार सात अंतरराष्ट्रीय खाद्य मानकों को मंजूरी मिली। भारत के प्रस्ताव पर काजू के लिए पहली बार अंतरराष्ट्रीय कोडेक्स मानक तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। बता दें, कोडेक्स मानक किसी भी खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता, सुरक्षा और लेबलिंग के लिए दुनियाभर में मान्य मानक होते हैं।
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बैठक में भारत की अध्यक्षता में तैयार सूखे धनिया और ताजे करी पत्ते के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाया गया। इससे भारतीय मसालों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्वीकार्यता बढ़ेगी और निर्यातकों को अलग-अलग देशों के अलग-अलग नियमों का सामना कम करना पड़ेगा। बैठक में भारत को खाद्य के नए स्रोत और उत्पादन प्रणालियां से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक वर्किंग ग्रुप का सह-अध्यक्ष भी चुना गया। यह समूह नई खाद्य तकनीकों व उत्पादन प्रणालियों से जुड़े वैश्विक नियामकीय ढांचे की समीक्षा करेगा और भविष्य में नए दिशा-निर्देशों पर काम करेगा।
काजू निर्यातकों के लिए बड़ी राहत
भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक काजू के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तैयार करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलना रहा। कोडेक्स आयोग ने भारत के प्रस्ताव का समर्थन किया। अब काजू की गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए एक समान वैश्विक मानक बनेगा। इससे भारतीय काजू निर्यातकों को वैश्विक बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, तकनीकी बाधाएं कम होंगी।
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इन पांच अन्य मानकों को भी मिली मंजूरी
भारत की सह-अध्यक्षता में तैयार पांच अन्य कोडेक्स दस्तावेजों को भी आयोग ने स्वीकार किया। इनमें वनीला और बड़ी इलायची के लिए अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानक की मंजूरी मिली। खाद्य उत्पादन व प्रसंस्करण में पानी के सुरक्षित उपयोग और पुनः उपयोग संबंधी गाइडलाइन पर भी सहमति बनी। चिकन मीट में कैंपिलोबैक्टर और साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया को नियंत्रित करने के लिए बनी गाइडलाइन भी मंजूर हो गई।