भारतीय तट रक्षक बल ने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में लिखा, 'भारतीय तटरक्षक जहाज C-425 ने सीने में दर्द से पीड़ित 59 वर्षीय भारतीय चालक दल के MEDEVAC को लाइबेरिया में 16 मार्च शाम 7 बजकर 50 मिनट पर पारादीप से मर्चेंट वेसल लीला लिस्बन को रवाना किया।
लाइबेरियन व्यापारिक जहाज- लीला लिस्बन पर यात्रा के दौरान चालक दल के एक सदस्य की तबीयत अचानक खराब हो गई। भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के जवान ओडिशा के समुद्र तट के पास देवदूत बनकर पहुंचे और 59 साल के इस यात्री की जान बचाई। खबर के मुताबिक आईसीजी के जहाज सी-425 ने रविवार को मेडिकल इमरजेंसी की सूचना मिलने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। लीला लिस्बन पर रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में आईसीजी ने बताया कि पीड़ित को इलाज के लिए ओडिशा के पारादीप लाने के बाद स्थानीय चिकित्सकों के हवाले कर दिया गया।
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बता दें कि भारतीय तटरक्षक बल ने रविवार शाम 7.50 बजे (आईएसटी) निकासी की। इसके बाद जहाज ने मरीज को आगे की चिकित्सा सहायता के लिए पारादीप में शिपिंग एजेंट को सौंप दिया।
भारतीय तट रक्षक बल ने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में लिखा, 'भारतीय तटरक्षक जहाज C-425 ने सीने में दर्द से पीड़ित 59 वर्षीय भारतीय चालक दल के MEDEVAC को लाइबेरिया में 16 मार्च शाम 7 बजकर 50 मिनट पर पारादीप से मर्चेंट वेसल लीला लिस्बन को रवाना किया। आईसीजी जहाज ने बाद में मरीज को आगे के चिकित्सा प्रबंधन के लिए पारादीप में शिपिंग एजेंट को सौंप दिया।
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समुद्री डाकुओं ने किया आत्मसमर्पण
इससे पहले शनिवार को, भारतीय युद्धपोत आईएनएस कोलकाता ने 35 समुद्री डाकुओं को पकड़ा। भारतीय नौसेना ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि आईएनएस ने सभी को घेरकर आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर किया, जिससे बिना किसी चोट के एक व्यापारी जहाज से चालक दल के 17 सदस्यों की सुरक्षित निकाला गया।
आईएनएस कोलकाता ने 40 घंटे तक चले बचाव अभियान में, भारतीय समुद्र तट से लगभग 2600 किमी दूर चल रहे हमलावर समुद्री डाकू जहाज, रुएन को रोका। कैलिब्रेटेड कार्यों के माध्यम से इस जहाज को रुकने के लिए मजबूर किया। इसके बाद अवैध हथियारों, गोला-बारूद और प्रतिबंधित सामग्री की उपस्थिति के लिए जहाज को भी साफ किया गया।