कोयला घोटाले में फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा समाज के शीर्ष पदों पर बैठे लोग जब अपराध करते हैं तो वह व्हाइट कॉलर क्राइम कहलाया जाता है। ऐसे अपराध सबको अपनी तरफ आकर्षित भी करते हैं। व्हाइट कॉलर अपराध सामान्य अपराध की तुलना में अधिक घातक है क्योंकि इससे आर्थिक हानि अधिक यानि करोड़ों में होती है। इससे जनता का मनोबल टूटता है। यह भी सच है कि व्हाइट कॉलर क्राइम अपराध को पकड़ना बहुत कठिन है क्योंकि यह समाज के उच्च ओहदों पर बैठे समझदार, प्रशिक्षित लोगों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से किया जाता है।
विशेष सीबीआई जज भरत पराशर ने कहा कि हम सामान्य अपराध के कारण के तौर पर गरीबी, बुनियादी सुविधाओं की कमी, मनोरंजन की कमी, छोटी सोच व भावनात्मक अस्थिरता को गिनते हैं। लेकिन व्हाइट कॉलर क्राइम में जिनमें कारोबारी, पेशेवर, राजनेता, अधिकारी आदि उच्च पदस्थ लोग शामिल होते हैं वह अपने कारोबार, निजी स्वतंत्रता व खुली प्रतिस्पर्धा की आड़ में लालच व लालसा के कारण ज्यादा से ज्यादा भौतिक संसाधनों को जोड़ने के चलते अपराध करते हैं।
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