सूबे की सत्ता संभालने के बाद भाजपा की योगी आदित्यनाथ सरकार ने नवरात्रि व रामनवमी के खास मौके पर कैबिनेट की पहली बैठक की। सरकार ने इसमें नौ अहम फैसले किए। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादे के मुताबिक लघु व सीमांत किसानों के फसली ऋण की माफी को भी मंजूरी दे दी गई।
31 मार्च 2016 तक लिए गए ऋण में से वित्त वर्ष 2016-17 में चुकाए गई धनराशि को घटाते हुए अधिकतम एक लाख रुपये की सीमा तक का कर्ज माफ किया जाएगा। करीब 86 लाख से अधिक किसान कर्जमाफी का फायदा पाएंगे और सरकार पर इससे 36,359 करोड़ का बोझ आएगा।
19 मार्च को शपथ ग्रहण के 17वें दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक लोक भवन में हुई। इसमें कर्जमाफी के वादे पर मुहर लगा दी गई। कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि पिछले सालों में सूखा, ओलावृष्टि व बाढ़ से किसानों का काफी नुकसान हुआ था।
विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए कैबिनेट की पहली बैठक में ही कर्ज माफ कराने का वादा किया था। कैबिनेट ने कर्जमाफी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 2.30 करोड़ किसान हैं। इनमें 92.5 फीसदी लघु व सीमांत किसान हैं। इनका 30729 करोड़ ऋण माफ किया गया है। फसली ऋण माफी की अधिकतम सीमा प्रति किसान एक लाख रुपये होगी।
इसके अलावा सात लाख किसान ऐसे हैं जिन्होंने ऋण लिया लेकिन वह नॉन परफार्मिंग एसेट (एनपीए) बन गया। यह रकम 5630 करोड़ रुपये है। इन किसानों को बैंकों ने फसली ऋण देना बंद कर रखा है। ऐसे किसानों को मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार ने एनपीए की पूरी रकम एकमुश्त समाधान (ओटीएस) केरूप में माफ करने का फैसला किया है। इस फैसले से ये किसान फिर से बैंकिंग सेवाओं का लाभ ले सकेंगे। कर्जमाफी से सरकार पर कुल करीब 36,359 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
ये हैं लघु व सीमांत किसान
प्रदेश के एक हेक्टेयर अर्थात 2.5 एकड़ तक के सभी किसान सीमांत किसान की श्रेणी में आएंगे। इस तरह दो हेक्टेयर अर्थात पांच एकड़ तक केसभी किसान लघु किसान माने जाएंगे। योजना का लाभ प्रदेश के सभी लघु व सीमांत किसानों को मिलेगा। प्रारंभिक गणना के मुताबिक प्रदेश में ऐसे 86.88 लाख लघु व सीमांत किसान हैं जिन्होंने बैंकों से फसली ऋण लिया हुआ है। प्रवक्ता ने बताया कि सहकारी सहित किसी भी बैंक से फसली ऋण लेने वाले किसान कर्जमाफी का फायदा पाएंगे।
मुख्य सचिव की कमेटी ऋणमाफी का विस्तृत प्लान बनाएगी
कैबिनेट ने ऋणमाफी योजना के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आठ अधिकारियों की एक कमेटी बनाई है। इसमें कृषि उत्पादन आयुक्त, अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव वित्त, संस्थागत वित्त, सहकारिता व राज्य बैंक समन्वयक सदस्य हैं। यह समिति सभी पहलुओं का अध्ययन कर विस्तृत फसली ऋण माफी योजना तैयार करेगी व मुख्यमंत्री से अनुमोदन लेकर क्रियान्वित करेगी। समिति योजना के वित्त पोषण के लिए अपनी संस्तुतियां भी सरकार को देगी जिसके आधार पर सरकार इसके लिए पैसे की व्यवस्था कर सकेगी।
इसलिए की कर्जमाफी
‘किसान राहत बांड’ लाएगी सरकार
सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने नई सरकार में विधानमंडल का पहला सत्र जल्दी बुलाने का संकेत किया है। उन्होंने बताया कि किसानों की कर्जमाफी के लिए केंद्र सरकार मदद नहीं दे रही है। ऐसे में प्रदेश सरकार कर्जमाफी के लिए ‘किसान राहत बांड’ लाएगी। इसके लिए विधानमंडल की मंजूरी ली जाएगी।
ऐसे में सरकार सत्र बुलाने में ज्यादा देर नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि राज्य का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का तीन प्रतिशत रह सकता है। बांड लाने से यह सीमा बढ़ेगी, इसके लिए विधानमंडल की अनुमति ली जाएगी।
इसलिए की कर्जमाफी
सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि प्रदेश की करीब 78 फीसदी जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। इसमें 68 फीसदी परिवार कृषि पर निर्भर हैं। उन्होंने बताया कि गत तीन वर्षों में सूखा, बाढ़ व ओलावृष्टि से सर्वाधिक कुठाराघात लघु व सीमांत किसानों पर हुआ है जिससे वे फसली ऋण अदायगी नहीं कर पा रहे हैं।
ऐसे किसानों के सूदखोरों व साहूकारों के भंवरजाल में फंसने की आशंका है। इससे कृषि सेक्टर की विकास दर भी रुकने की संभावना है। उन्होंने बताया कि 2016-17 में जहां राज्य केसकल घरेलू उत्पादन की वृद्धि दर 7.4 फीसदी अनुमानित है, वहीं कृषि व पशुपालन सेक्टर में यह 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
2011-12 से 2014-15 के बीच प्रदेश में प्रति व्यक्ति कुल आय में 3.2 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि रही है जबकि कृषि व पशुपालन क्षेत्र में यह वृद्धि मात्र 1.2 प्रतिशत रही। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता है कि पिछले तीन सालों से प्राकृतिक आपदाओं का दंश झेल रहे इन लघु व सीमांत किसानों का फसली ऋण माफ कर मदद की जाए। इससे लोक कल्याण संकल्प पत्र के माध्यम से कृषि विकास का बने आधार की प्रतिबद्धता व्यक्त होती है।